लखनऊ12 घंटे पहले

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यूपी में प्रस्तावित फिल्म सिटी का मॉडल।

  • यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के प्रस्ताव पर लगी मुहर, 1000 एकड़ पर बनेगी फिल्म सिटी
  • बॉलीवुड के कलाकार बोले- सरकार के पास महज डेढ़ साल का समय, अगर लैंड एलॉट हो जाए तो बने बात

उत्तर प्रदेश को फिल्म निर्माण का केंद्र बनाने के लिए सीएम योगी ने फिल्म सिटी बनाने का ऐलान किया है। इसकी पटकथा योगी ने 18 सितंबर को तब लिखी जब वे मेरठ मंडल की समीक्षा अपने आवास पर कर रहे थे। इसके बाद 4 दिनों के भीतर बॉलीवुड की नामचीन हस्तियों के साथ सीएम योगी ने बैठक भी कर ली। इस दौरान सीएम योगी ने अपनी मंशा जाहिर की और सुझाव भी लिए। गायक उदित नारायण ने योगी की शाम में गीत भी गाए। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब भाजपा सरकार के पास महज डेढ़ साल का कार्यकाल बचा है। ऐसे में क्या वह नोएडा में फिल्म सिटी खड़ी कर पाएंगे, वह भी तब जब बीते 30 सालों में चार बार फिल्म सिटी बनाने की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है।

यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण के प्रस्ताव पर लगी मुहर

यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि हमारे पास औद्योगिक भूमि सेक्टर 21 में उपलब्ध है। जहां 500 एकड़ लैंड बैंक हमारे पास है। जबकि 500 एकड़ अधिग्रहित करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि 780 एकड़ भूमि औद्योगिक गतिविधियों के लिए है। जबकि 220 एकड़ भूमि व्यवसायिक गतिविधियों के लिए है। इसके चारों तरफ 130 मीटर की रोड रहेगी, साथ ही 50 मीटर ग्रीन एरिया रहेगा। वहीं ट्रांसपोर्टेशन गतिविधियों के लिए भी जगह दी जाएगी।

यीडा के सेक्टर 21 में चिन्हित स्थल।

यीडा के सेक्टर 21 में चिन्हित स्थल।

नोएडा विकास प्राधिकरण ने 500 एकड़ का प्रस्ताव दिया था। इसमें सेक्टर 162, 164, 165, 166 को शामिल किया गया था। प्राधिकरण के पास इन जगहों पर 200 एकड़ का लैंड बैंक था, जबकि 300 एकड़ अधिग्रहित करना होता। जबकि, ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने 550 एकड़ की भूमि का प्रस्ताव भेजा था। इस पर मुलायम सरकार में नाइट सफारी बनना प्रस्तावित था। यह भूमि गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी कैम्पस के पास मुर्शदपुर गांव में है। यहां 250 एकड़ जमीन प्राधिकरण के पास है, जबकि 300 एकड़ अधिग्रहित करनी होती।

क्या कुछ होगा खास?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे विश्व की बेहतर फिल्म सिटी बनाने का दावा किया है। फिल्म सिटी में विश्व स्तरीय फिल्म म्यूजियम बनाया जाएगा। जिसमें बेहतरीन फिल्म का संग्रह होगा, साथ ही निर्माण प्रक्रिया और फेमस स्टूडियो के बारे में बताया जाएगा। इसके साथ ही एक फिल्म विश्वविद्यालय बनाने का भी प्रस्ताव है। इसमें निर्देशन, स्क्रिप्ट राइटिंग, सिनेमैटोग्राफी, एनीमेशन, साउंड रिकॉर्डिंग जैसे पाठ्यक्रम रखे जाएंगे। साथ ही 5 स्टार और 3 स्टार और कम बजट के होटल भी बनाया जाना प्रस्तावित है।

लखनऊ में फिल्म सिटी बनती तो बेहतर होता

यूपी से जुड़े रहे और मुंबई में फिल्म निर्देशक अनिल बलानी कहते हैं कि फिल्म सिटी लखनऊ में होती तो बेहतर होता। क्योंकि यह यूपी का सेंटर है और कनेक्टिविटी भी है। मुंबई फिल्म सिटी क्यों डेवलप हुई? इसके पीछे उसकी भौगोलिक स्थिति है। मुंबई में समुद्र है, मुंबई में पहाड़ियां है, मुंबई में जंगल भी हैं। यहां सब कुछ एक जगह पर है। इसी तरह लखनऊ, बनारस, जौनपुर और बुंदेलखंड जैसी जगहों पर भी अच्छी लोकेशन है, जहां हमें वैरायटी मिल सकती है। उन्होंने कहा लखनऊ में फिल्म सिटी होने से रोजगार भी बढ़ता। चूंकि लखनऊ से बिहार, झारखंड, उड़ीसा जैसे राज्य पास पड़ते हालांकि अब उन्हें एनसीआर तक जाना होगा।

एक्टर अनिल रस्तोगी।

एक्टर अनिल रस्तोगी।

प्राथमिकता में होगी फिल्म सिटी जो जरूर बनेगी, मगर सरकार अपने हाथों में रखे कमान

  • एक्टर अनिल रस्तोगी इसे सिर्फ एक पॉलिटिकल मूव बता रहे हैं। कहते हैं कि 90 के दशक में भी यह ऐलान हो चुका है, लेकिन हुआ कुछ नहीं। अब सरकार को तय करना होगा कि क्या फिल्म सिटी उनकी प्राथमिकता में है या नहीं। क्योंकि सरकार के सामने इससे भी बड़े बड़े मुद्दे हैं और जिनका हल बहुत जरूरी है। हां, अगर सरकार लैंड एलॉट कर दे तो उम्मीद बांधी जा सकती है। फिलहाल यह अच्छी खबर है कि यूपी में फिल्म इंडस्ट्री बनने जा रही है।
  • यूपी के लेखक और एक्टर अतुल तिवारी कहते हैं नोएडा में भी फिल्म सिटी बनाई गई थी, लेकिन उसे प्राइवेट हाथों में सौंप दिया गया। अगर इस तरह की फिल्म सिटी बननी है तो मैं नहीं चाहता ऐसी फिल्म सिटी बने। अगर लैंड को प्राइवेट लोगों में बांटना शुरू किया तो फिर वह लोग क्या करेंगे यह किसी को नहीं पता। फिल्म सिटी की कमान सरकार के पास हो। ऐसा न हो कि पहले की तरह किसी को भी लैंड बांट दी जाए और वह फिल्म से जुड़ा कोई काम भी न करे।
लेखक व एक्टर अतुल तिवारी।

लेखक व एक्टर अतुल तिवारी।

प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के लायक अभी नहीं है मार्केट

सीनियर जर्नलिस्ट सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं कि 30 सालों में चौथी बार फिल्म सिटी का ऐलान हुआ है। 1993 में फिल्म सिटी बनने का एलान हुआ था, लेकिन वहां सबकुछ है, लेकिन फिल्म नहीं है। इसी तरह अखिलेश सरकार में दो बार एलान हो चुका है। अब चौथी बार सीएम योगी ने ऐलान किया है। अभी सरकार के पास समय कम है। डेढ़ साल का समय इसके लिए अभी कम है। किसी भी फिल्म सिटी का डेवलपमेंट तय करता है प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पर। जिसके लिए अभी न तो इन्वेस्टर पैसा लगा रहे हैं न ही मार्केट की कंडीशन ऐसी है। बॉलीवुड में जो भी है वह मुनाफा कमाना चाहता है। ऐसे में वह यूपी में क्यों आकर स्टूडियो बनाएगा और क्यों यहां फिल्म शूट करेगा जबकि मुंबई में उसे सब कुछ बना बनाया मिल रहा है।

ऐसी है यूपी की फिल्म नीति

  • यूपी में रीजनल भाषा (अवधी, ब्रज, बुंदेली, भोजपुरी) में फिल्म बनाने वाले को उसकी लागत का अधिकतम 50% अनुदान।
  • हिंदी, अंग्रेजी और देश की अन्य भाषा में फिल्म बनाने पर लागत का अधिकतम 25% की सब्सिडी।
  • यदि फिल्म की आधी शूटिंग यूपी में की जाती है तो 1 करोड़ तक का अनुदान मिलेगा।
  • दो तिहाई शूटिंग करते हैं तो 2 करोड़ रुपए तक अनुदान।
  • यदि दूसरी फिल्म यूपी में बनाते हैं और उसकी आधी शूटिंग यहां करते हैं तो उसके लिए 1.25 करोड़ की सब्सिडी।
  • यदि दूसरी फिल्म की दो तिहाई शूटिंग करते हैं तो उसके लिए 2.25 करोड़ रुपए सब्सिडी मिलती है।
  • तीसरी फिल्म की आधी शूटिंग पर 1.50 करोड़ और दो तिहाई शूटिंग करने पर 2.50 करोड़ की सब्सिडी मिलती है।
  • यदि किसी फिल्म के पांच मुख्य कलाकार यूपी के है तो सरकार उनको पारिश्रमिक के रूप में दिए जाने वाली धनराशि या फिर 25 लाख रुपए की सब्सिडी भी देती है।

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By Raj

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