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  • Hearing Today In The Court Of Krishna Janmabhoomi Case In Mathura, Claiming On 13.37 Acres Of Land Has Been Done For The Ownership

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मथुरा9 दिन पहले

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यूपी के मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की याचिका को स्वीकार अथवा अस्वीकार करने पर अदालत में सुनवाई आज होगी।

  • भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने याचिका दायर की है
  • पिटीशन के मुताबिक, जिस जगह पर शाही ईदगाह मस्जिद खड़ी है, वही जगह कारागार था, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की सिविल कोर्ट में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की याचिका को स्वीकार अथवा अस्वीकार करने पर अदालत में सुनवाई आज होगी। इसके मद्देनजर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इस दौरान याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता अदालत में मौजूद रहेंगे। 13.37 एकड़ जमीन पर 1973 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद के बीच हुए समझौते और उसके बाद की गई डिक्री (न्यायिक निर्णय) को रद्द करने संबंधी याचिका पर निर्णय होगा।

बताया जा रहा है कि यदि अदालत याचिका को स्वीकार कर लेती है तो इस संबंध में सभी विपक्षियों को समन जारी कर अग्रिम न्यायिक प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। कोर्ट में सुनवाई से पहले सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। एसपी सिटी उदय शंकर सिंह ने बताया कि न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।

वकील विष्णु शंकर ने दायर की है याचिका
भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने याचिका दायर की है। इसमें जमीन को लेकर 1968 के समझौते को गलत बताया। यह केस भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर की ओर से वकील रंजना अग्निहोत्री और 6 अन्य भक्तों की ओर से दायर किया गया है।

याचिका में दावा- जिस जगह मस्जिद खड़ी है, वही असली कारागार
याचिका ‘भगवान श्रीकृष्ण विराजमान’ और ‘स्थान श्रीकृष्ण जन्मभूमि’ के नाम से दायर की गई है। इसके मुताबिक, जिस जगह पर शाही ईदगाह मस्जिद खड़ी है, वही जगह कारागार था, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था।

वकील हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन ने बताया कि याचिका में अतिक्रमण हटाने और मस्जिद को हटाने की मांग की गई है। हालांकि, इस केस में Place of worship Act 1991 की रुकावट है। इस ऐक्ट के मुताबिक, आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था, उसी का रहेगा। इस ऐक्ट के तहत सिर्फ रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को छूट दी गई थी।

दरअसल, हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन हिंदू महासभा के वकील रहे हैं और इन्होंने रामजन्मभूमि केस में हिंदू महासभा की पैरवी की थी, जबकि रंजना अग्निहोत्री लखनऊ में वकील हैं। बताया जा रहा है कि जिस तरह राम मंदिर मामले में नेक्स्ट टू रामलला विराजमान का केस बनाकर कोर्ट में पैरवी की थी, उसी तरह नेक्स्ट टू भगवान श्रीकृष्ण विराजमान के रूप में याचिका दायर की गई है।

क्या है 1968 समझौता?
1951 में श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट बनाकर यह तय किया गया कि वहां दोबारा भव्य मंदिर का निर्माण होगा और ट्रस्ट उसका प्रबंधन करेगा। इसके बाद 1958 में श्रीकृष्ण जन्म स्थान सेवा संघ नाम की संस्था का गठन किया गया था। कानूनी तौर पर इस संस्था को जमीन पर मालिकाना हक हासिल नहीं था, लेकिन इसने ट्रस्ट के लिए तय सारी भूमिकाएं निभानी शुरू कर दीं।

इस संस्था ने 1964 में पूरी जमीन पर नियंत्रण के लिए एक सिविल केस दायर किया, लेकिन 1968 में खुद ही मुस्लिम पक्ष के साथ समझौता कर लिया। इसके तहत मुस्लिम पक्ष ने मंदिर के लिए अपने कब्जे की कुछ जगह छोड़ी और उन्हें (मुस्लिम पक्ष को) उसके बदले पास की जगह दे दी गई।



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By Raj

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