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मथुरा3 घंटे पहले

वृंदावन में यमुना तट पर हठयोग करते संत।

  • चौरासी धूनी कठिन साधना में लीन वैष्णव संप्रदाय के संत
  • वैष्णव साधुओं का प्रमुख केंद्र ब्रज, वृन्दावन और अयोध्या

राधा-कृष्ण की प्रेम लीला स्थली वृंदावन में वैष्णव महाकुंभ में आस्था व जप-तप जारी है। पहला शाही स्नान माघ पूर्णिमा पर 27 फरवरी को होगा। करीब 56 हेक्टेयर एरिया में महाकुंभ के लिए नया शहर बसा है। 40 दिन तक चलने वाले महाकुंभ में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है। इस बीच सूरज की तल्खी के बीच अपने चारों तरफ अग्नि जलाकर कठिन साधना करते हठयोगी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

अयोध्या से आए संत मलखान बाबा कठिन साधना में लीन

श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़ा, श्रीपंच निर्वाणी अनी अखाड़ा और श्रीपंच दिगंबर अनी अखाड़ा आदि ने शिविर लगा लिए हैं। देश के कोने-कोने से वैष्णव मत के साधु संतों का डेरा कुंभ परिक्षेत्र में लगा हुआ है। अलग-अलग साधना पद्वति के साधक अपनी उपासना से इष्ट को रिझाने में जुटे हैं। जिनमें से कुछ साधु हठ साधना कर जनकल्याण व आत्मबल वृद्धि की भावना को पुष्ट कर रहे हैं। ऐसे ही साधकों में एक अयोध्या से आए संत मलखान बाबा भी एक हैं। वे इन दिनों अपनी साधना के सबसे कठिन दौर में है। सिर के ऊपर आग से भरे मटके को रखकर बाबा आग की तपिश के बीच साधना में लीन हैं।

योग साधना में लीन हठयोगी।

योग साधना में लीन हठयोगी।

हठ योग की साधना का 18 वर्ष समय निर्धारित

अखिल भारतीय त्यागी पंच के रामशंकर त्यागी बताते हैं कि वैसे तो हठ योग साधना का 18 वर्ष का निर्धारित समय होता है। जिसमें पंच धूनी साधना से चौरासी धूनी साधना तक साधु करते हैं। लेकिन सबसे कठिन चौरासी धूनी साधना होती है। जिसमें साधक अपने चहुंओर चौरासी कुंडों की अग्नि जलाकर साधना करता है। भगवान सूर्य की तपिश के साथ आग की तपन में साधना करते साधुओं का अनुष्ठान बसंत पंचमी पर्व से शुरू होकर ज्येष्ठ माह के दशहरे तक चलता है। चार महीने की इस साधना में तप कर रहे साधु दोपहर में ही अपनी साधना शुरू करते हैं।

इसलिए वृंदावन कुंभ का महत्व

पवन कुंभ को वैष्णव कुंभ कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में वर्णन है कि वृंदावन में एक कुंड था। जिसमें कालिया नाग रहता था। उसके विष से जीवों को बचाने के लिए श्री कृष्ण इस नदी में कूदे और कालिया नाग का वध कर पानी को अमृत्व प्रदान किया।

वैष्णवों का कुंभ भी मानते हैं

वैष्णवों में यमुना को गंगा की तरह पवित्र माना है। गंगा नदी हरि के चरणों से निकलकर विष्णु पदी कहलाई। वहीं, यमुना को भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी माना गया है। यमुना की प्राचीनता गंगा से भी अधिक है। वृंदावन कुंभ को देवलोक और वैष्णव कुंभ भी कहा गया है। वैष्णव साधुओं का प्रमुख केंद्र ब्रज, वृन्दावन और अयोध्या है।



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By Raj

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