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आगरा15 घंटे पहलेलेखक: रवि श्रीवास्तव

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यह फोटो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के परिवार की है। इसमें अटलजी ऊपर की पंक्ति में दाएं से पहले खड़े हैं।

  • 2018 में निधन के बाद खुद मुख्यमंत्री ने बटेश्वर के विकास का दिया था भरोसा
  • परिजनों ने कहा- हम तो 2022 का इंतजार कर रहे हैं, हमारी शिकायतों का भी निस्तारण नहीं हुआ

2019 में हुए लोकसभा चुनाव से सात माह पहले 16 अगस्त 2018 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने अंतिम सांस ली थी। तब भाजपा ने देश में उनकी अस्थि कलश यात्रा निकाली थी। फिजाओं में अटल बिहारी बाजपेयी अमर रहे, वंदे मातरम् जैसे नारे गूंजे थे। देश के 22 राज्यों की 100 पवित्र नदियों में उनकी अस्थियों का विसर्जन किया गया था। उसमें उनका पैतृक निवास स्थान बटेश्वर (आगरा) भी शामिल था। CM योगी खुद यहां अटल की अस्थियां विसर्जित करने पहुंचे थे और यहां के कायाकल्प को लेकर बड़े बड़े वादे किए थे।

आज भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी का 96वां जन्मदिवस है। लेकिन इससे पहले दैनिक भास्कर ने जब बटेश्वर में विकास की पड़ताल की तो ऐसा कुछ मिला नहीं कि उसके बारे में बताया जा सके। बहरहाल, बटेश्वर में रहने वाले अटल के कुछ रिश्तेदार यह जरूर कहते हैं कि इस सरकार से हमें कोई उम्मीद नहीं है। यह मुख्यमंत्री ब्राह्मण विरोधी है। हम तो बस 2022 का इंतजार कर रहे हैं।

अटल के घर को म्यूजियम में तब्दील करने का वादा था
अटल बिहारी बाजपेयी की मौत के बाद लखनऊ के लोक भवन में अटल की बड़ी सी मूर्ति लगाई गई। लेकिन बटेश्वर में उनकी मूर्ति अभी तक नहीं लग पाई है। अटल के रिश्ते में भतीजे राकेश बाजपेई कहते हैं कि मैं खुद भाजपा युवा मोर्चा का ब्लॉक मंत्री रहा हूं। अटलजी के घर को म्यूजियम में तब्दील करने का वादा किया गया था। लेकिन कुछ नहीं हुआ। शिकायतों को लेकर मैंने कई बार शिकायती पत्र भेजा। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। अटल जी का घर जहां हम सभी साथ रहते थे। अब वह खंडहर हो चुका है। उसमें बबूल के पेड़ उग आए हैं। राकेश बताते हैं कि हमारे ज्यादातर रिश्तेदार या तो ग्वालियर चले गए या फिर दिल्ली शिफ्ट हो गए। बस 5 से 7 लोग ही बचे हुए हैं।

पूर्व पीएम अटल बिहरी का मलबे में तब्दील घर।

पूर्व पीएम अटल बिहरी का मलबे में तब्दील घर।

गांव से 20 किमी दूर डिग्री कॉलेज की जमीन फाइनल
अटल के भतीजे अश्वनी बाजपेई कहते हैं कि हम गांव वालों ने एक डिग्री कॉलेज की मांग की थी। इसके लिए ग्राम सभा की 2 एकड़ जमीन का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन डिग्री कॉलेज अफसरों ने गांव से 20 किमी दूर अभयपुरा में प्रस्तावित किया है। अश्वनी कहते है कि पार्क बनाना था। वह भी अभी कुछ नहीं हो पाया है। यही नहीं, अटल जी अपनी कुलदेवी के मंदिर में पूजा किया करते थे, वह भी जीर्ण शीर्ण अवस्था में है। अश्वनी कहते है कि जब जन्मदिन आता है तो यहां अफसर नेताओं का आना जाना जारी हो जाता है, लेकिन होता कुछ नहीं है। अभी जब उनकी मृत्यु हुई, तब भी अफसर आए थे लेकिन कुछ हुआ नहीं।

सबसे दाहिने अटल के भतीजे अश्वनी बाजपेयी।

सबसे दाहिने अटल के भतीजे अश्वनी बाजपेयी।

स्वतंत्रता आंदोलन में जिस कोठी को आग लगाई थी, उसका भी होना था जीर्णोद्धार

राकेश बाजपेई बताते हैं कि अटल की एक बहन और बहनोई यहां रहते थे। लेकिन दोनों की ही अब मृत्यु हो चुकी है। यहां एक जंगलात कोठी है। बताया जाता है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अटल ने उस कोठी में आग लगा दी थी। सरकार उसे अटल की याद में उसका जीर्णोद्धार करवाने का ऐलान किया था।

अटल के भतीजे राकेश बाजपेयी।

अटल के भतीजे राकेश बाजपेयी।

उजड़ चुका है मशहूर बाजपेई मोहल्ला

राकेश बाजपेई बताते हैं कि मशहूर बाजपेई मोहल्ला भी यहां से उजड़ चुका है। सड़क के दोनों तरफ खंडहर और बबूल के झाड़ झंखाड़ उगे हुए हैं। उन्होंने कहा यह जगह भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री से जुड़ी हुई है। इसीलिए हम इसे सहेजना चाहते हैं। वैसे भी ज्यादातर लोग अब गांव छोड़ कर जा चुके हैं। यह बीहड़ आज भी बीहड़ ही है। कोई नौजवान तो कम से कम यहां नहीं रुकना चाहता है।

बटेश्वर हाल्ट स्टेशन।

बटेश्वर हाल्ट स्टेशन।

2015 में एक स्टेशन बना था, अब वहां ट्रेन भी नहीं आती है

राकेश बताते हैं कि अंतिम बार अटल बिहारी बाजपेयी 2003 में आगरा-बटेश्वर रेलवे लाइन का शिलान्यास करने आए थे। 2015 में बटेश्वर में रेलवे स्टेशन के नाम पर एक हॉल्ट स्टेशन बनाया गया। एक ट्रेन भी चली, जोकि सुबह और उसके बाद शाम को आती थी। लेकिन जबसे कोरोना शुरू हुआ तब से वह भी बन्द हो गयी। अब तो स्टेशन का कोई कर्मचारी भी नहीं आता है।

अटल की यह कुलदेवी का मंदिर है। यहां वे पूजा पाठ करते थे।

अटल की यह कुलदेवी का मंदिर है। यहां वे पूजा पाठ करते थे।

घाटों को भी संवारना था

राकेश बताते हैं कि जहां अटल जी बचपन मे यज्ञ किया करते थे, वहां यज्ञशाला का निर्माण होना था। लेकिन अभी कुछ दिन पहले वहां समतलीकरण का काम हो रहा था। पता चला था कि CM वर्चुअल शिलान्यास करेंगे। लेकिन वह भी कैंसिल हो गया। वहीं अश्वनी कहते हैं कि घाटों के किनारे बने मंदिरों को भी संवारने के ऐलान हुआ था लेकिन हम बाट जोह रहे हैं।

अटल के करीबी शिव कुमार बोले -उम्मीद न छोड़े सरकार सब करेगी

अटल बिहारी बाजपेयी के करीबी वरिष्ठ भाजपा नेता शिव कुमार ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि बटेश्वर के लोगों को उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। सरकार अभी दूसरे जरूरी मुद्दों में उलझी हुई है। साथ ही सरकारी कामों में थोड़ी देर होती है। लेकिन काम जरूर होता है। इसलिए सरकार पर भरोसा बनाए रखें।



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By Raj

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