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लखनऊ17 घंटे पहले

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न्यास कार्यशाला में मंदिर निर्माण के लिए वर्ष 92 से पत्थरों की तराशी का कार्य किया जा रहा है। ग्राउंड फ्लोर के पत्थर तराशे से जा चुके हैं।

  • फूल माला से सजाकर ट्रक से ले जाने के लिए तैयार हुए पत्थर
  • पत्थरों पर लगी काई को हटाने के लिए तीन महीने चला काम

अयोध्या में 1992 से राम मंदिर कार्यशाला में तराश कर रखे गए करीब डेढ़ लाख घनफीट पत्थरों को मंदिर परिसर में ले जाने का काम शुक्रवार से शुरू हो गया। अब निर्माणल स्थल पर ही बाकी के पत्थरों को भी तराशने का काम होगा। कार्य वाला में रखे पत्थरों पर काई लग गई थी, जिसे रासायनिक मिश्रण से चमकाने का काम तीन महीने तक चला।

मंदिर के मुख्य आर्किटेक्ट निखिल सोमपुरा का कहना है कि नींव का बेस तैयार होने के बाद मंदिर के पत्थरों का काम वे शुरू करेगे। इस बीच पहले व दूसरे फ्लोर के पत्थरों को तराशने का काम तेजी से पूरा किया जाएगा।

श्रीराम जन्म भूमि न्यास कार्यशाला से तराशे गए पत्थरों को राम जन्मभूमि परिसर ले जाने की कार्यवाही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने शुरू कर दी है। निर्माण एजेंसी एलएंडटी के इंजीनियर प्रथम चरण में ग्राउंड फ्लोर के पत्थरों को शिफ्ट कर रहे हैं।

कार्यशाला के सुपरवाइजर मनोज सोमपुरा के मुताबिक पत्थर एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाते समय क्षतिग्रस्त न हो, इसका विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पत्थरों को रखने की व्यवस्थाएं मंदिर निर्माण एजेंसी एलएंडटी ने परिसर में पूरी कर ली हैं। इसके लिए परिसर में 500 एवं 200 फिट के दो बड़े स्थान और मजदूरों को काम करने के लिए 100 बाई 100 फिट के फील्ड बनाई गई है।

सन 1992 से ही चल रहा था पत्थरों को तराशने का काम

उन्होंने बताया प्रथम चरण में ग्राउंड फ्लोर के तराशे गए पत्थरों को ले जाने की कार्रवाई की जा रही है। आने वाले समय में ट्रकों की संख्या बढ़ाकर कार्य तेज किया जाएगा। ट्रस्ट की अनुमति पर रात में भी पत्थरों को ले जाने का कार्य किया जाएगा।

दरअसल, न्यास कार्यशाला में मंदिर निर्माण के लिए 1992 से पत्थरों की तराशी का कार्य किया जा रहा है। ग्राउंड फ्लोर के पत्थर तराशे जा चुके हैं। अब बाकी बचे करीब डेढ़ लाख घनफीट पत्थरों को तराशने का कार्य राम जन्मभूमि परिसर में ही होगा।



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By Raj

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