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गोरखपुरएक घंटा पहले

एलईडी बल्ब बनाता अमर।

  • मेक इन इंडिया से प्रभावित है छात्र, पिता से दो लाख रुपए लेकर शुरू किया व्यापार
  • अब तक आठ लाख रुपए का निवेश किया, ढाई लाख का मुनाफा कमाया

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में रहने वाला अमर प्रजापति अभी महज 14 साल का है और कक्षा आठ का छात्र है। लेकिन, कुछ नया करने के जज्बे और उसके बड़े सपनों ने आज उसे शहर का सबसे नन्हा उद्यमी बना दिया है। कोरोना संकट काल में जब स्कूल-कॉलेज बंद हुए तो अमर ने बल्ब बनाने की ट्रेनिंग ली और छोटे पैमाने पर अपना व्यापार शुरू किया। कुछ ही दिनों में मिले अच्छे परिणाम से आज वह एलईडी बल्ब निर्माण कंपनी चला रहा है। अमर ने इतनी कम उम्र में रोजगार तो अपनाया ही, चार अन्य लोगों को भी काम दिया है। उसने अपनी कंपनी की एक वेबसाइट भी बनाई है और अब अपने उत्पाद को ऑनलाइन भी बेचने की योजना बना रहा है।

अमर द्वारा बनाई गई लाइटें।

अमर द्वारा बनाई गई लाइटें।

आइए जानते हैं कैसे शुरू हुआ अमर का सफर?

सिविल लाइंस में रहने वाले रमेश कुमार प्रजापति गोरखपुर डेवलेपमेंट अथॉरिटी (गीडा) में कार्यरत हैं। तीन बच्चों में अमर उनका मंझला पुत्र है। वह आरपीएम एकेडमी में 8वीं का छात्र है। वह वैज्ञानिक बनना चाहता है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया से काफी प्रभावित है। लॉकडाउन में जब स्कूल कॉलेज बंद हुए तो उसकी पढ़ाई भी ठप हुई। ऐसे में उसने एलईडी बल्ब बनाने का प्रशिक्षण लेने की इच्छा जाहिर की, जिस पर पिता ने हामी भर दी।

अमर ने बताया कि उसने अप्रैल माह में गीडा में ट्रेनर और उद्यमी विवेक सिंह से पांच तरह की एलईडी लाइट बनाना महज पांच दिनों में ही सीख लिया। वर्तमान में वह उद्यमिता विकास संस्‍थान से रॉ मटेरियल (कलपुर्जे) मंगाते हैं। इसके बाद घर पर ही बल्ब बनाना शुरू किया। शुरुआत में बमुश्किल 10 से 15 बल्ब ही वह बना पाता था। लेकिन अब वह दिन भर में 500 से 700 बल्ब तैयार करते हैं। अमर ने अपने पिता के गुरु के नाम से जीवन प्रकाश इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी रजिस्टर्ड कराई है। कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्‍टर मां सुमन प्रजापति हैं। इसके साथ ही उन्‍होंने अपने यहां चार लोगों को रोजगार भी दिया है जो उसका हाथ बंटाते हैं।

अमर के इस काम में माता-पिता ने पूरा सहयोग किया। शुरूआत में पिता ने दो लाख रुपए का निवेश किया। अब तक 8 लाख रुपए इस कंपनी में इनवेस्ट हो चुके हैं। पांच लाख का माल बिक चुका है, जिससे ढाई लाख रुपए का मुनाफा हुआ है।

अमर ने कहा कि स्कूल अभी खुले नहीं हैं। इसलिए ऑनलाइन क्लासेज चल रही है जो 12 बजे तक खत्म हो जाती है। इसके बाद वह अपने प्रोडक्ट को तैयार करने में जुट जाता है। उसके इस काम में कक्षा 10वीं में पढ़ने वाली बहन प्रिया प्रजापति और कक्षा 7 में पढ़ने वाले छोटे भाई लकी प्रजापति भी सहयोग करते हैं। अमर बताते हैं कि बाजार में कई बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट हैं। ऐसे में प्रतिस्‍पर्धा के दौर में क्वालिटी और ऑफर में कोई समझौता नहीं किया है। हमारे बल्ब काफी सस्ते हैं।

अपनी मां व भाई-बहन के साथ अमर।

अपनी मां व भाई-बहन के साथ अमर।

बच्चे जिस क्षेत्र में जाना चाहें, जाने दीजिए

अमर की मां सुमन प्रजापति बताती हैं कि उनके मंझले बेटे अमर प्रजापति को इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट बनाने में काफी रुचि रही है। आज हमारा काम दो लाख रुपए से शुरू होकर 8 लाख रुपए तक पहुंच गया है। वे कहती हैं कि बच्‍चों की जिस भी क्षेत्र में रुचि हो। उनके माता-पिता को उनका पूरा सहयोग करना चाहिए। जिससे बच्‍चे आगे बढ़ सकें।

लॉकडाउन में रोजगार मिला

अमर की कंपनी जीवन प्रकाश के मैनेजर मंजेश कुमार शर्मा और कर्मचारी भावेश कुमार प्रजापति बताते हैं कि कोरोना काल में जहां रोजी-रोजगार की परेशानी थी। कंपनी में काम करने का मौका मिला और आज सबकी मेहनत से कंपनी का काम अच्‍छा चल रहा है। उन्‍हें रोजगार मिलने से उनका भी परिवार फल-फूल रहा है। वे इस कंपनी को काफी आगे ले जाना चाहते हैं। जिससे उनके प्रोडक्‍ट शहर से बाहर भी बाजार पा सकें।



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By Raj

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