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प्रयागराज25 दिन पहले

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पूरे EDFC के लिए प्रयागराज का ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर एक कमांड सेंटर की तरह काम करेगा। ये सेंटर दुनिया भर में इस तरह के सबसे बड़े स्ट्रक्चर में से एक है। - Dainik Bhaskar

पूरे EDFC के लिए प्रयागराज का ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर एक कमांड सेंटर की तरह काम करेगा। ये सेंटर दुनिया भर में इस तरह के सबसे बड़े स्ट्रक्चर में से एक है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के न्यू भाउपुर-न्यू खुर्जा सेक्शन का उद्घाटन किया
  • मालगाड़ियों के संचालन के लिए प्रयागराज में बनाया गया एशिया का सबसे बड़ा ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) के न्यू भाउपुर-न्यू खुर्जा सेक्शन का उद्घाटन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया। इसका फायदा यह होगा कि कानपुर-दिल्ली रूट पर ट्रेनें लेट नहीं होंगी। मालगाड़ियां भी समय पर पहुंच सकेंगी।

इसका ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर प्रयागराज के सूबेदारगंज में है। यह एशिया का सबसे बड़ा कंट्रोल सेंटर है। इसमें आधुनिक इंटीरियर्स का इस्तेमाल किया गया है और इसका डिजाइन भी शानदार है। यह बिल्डिंग इको फ्रेंडली है। इस कंट्रोल रूम से EDFC के पूर्वी कॉरीडोर में चलने वाली मालगाड़ी ट्रेनों की निगरानी की जाएगी। इस पूरे कॉरीडोर की लंबाई 1,856 किलोमीटर है। EDFC के मुख्य महाप्रबंधक पूर्व ओम प्रकाश ने इसकी खूबियों के बारे में बताया।

मोदी ने कहा कि नए फ्रेट कॉरिडोर में मैनेजमेंट और डेटा से जुड़ी टेक्नोलॉजी भारत में ही तैयार की गई है।

मोदी ने कहा कि नए फ्रेट कॉरिडोर में मैनेजमेंट और डेटा से जुड़ी टेक्नोलॉजी भारत में ही तैयार की गई है।

2022 तक पूरा करने का लक्ष्य

दिल्ली-हावड़ा रूट पर क्षमता से अधिक ट्रेनों के संचालन की वजह से ही मालगाड़ी के लिए अलग रूट बनाया जा रहा है। 2022 तक EDFC का काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद पंजाब के लुधियाना से लेकर पश्चिमी बंगाल के दानकुनी तक मालगाड़ियों को अलग रास्ता मिल जाएगा। उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय के पास सूबेदारगंज में मार्च 2017 में EDFC के कंट्रोल रूम का शिलान्यास हुआ था। कंट्रोल रूम में 11*5 मीटर की चार स्क्रीन लगाई गई है। इन स्क्रीन पर लुधियाना से लेकर दानकुनी के बीच चलने वाली सभी मालगाड़ियों की स्थिति दिखाई देगी। इस कंट्रोल रूम को 75 करोड़ रुपए में तैयार करवाया गया है।

मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक:मोदी ने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सेक्शन की शुरुआत की, कहा- किसानों को भी फायदा होगा

दो हजार से ज्यादा मालगाड़ियों के स्पीड की हो चुकी निगरानी

23 सितंबर 2019 से EDFC के कंट्रोल सेंटर से अब तक दो हजार मालगाड़ियों की निगरानी की जा चुकी है। यहां भाऊपुर से खुर्जा के बीच कुल 351 किमी लंबे रूट पर ट्रायल के रूप में मालगाड़ियों की रफ्तार भी बढ़ाकर सौ किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। जून 2022 तक लुधियाना से पश्चिमी बंगाल के दानकुनी तक कुल 1856 किमी लंबा यह रूट पूरी तरह तैयार हो जाएगा। मार्च 2021 तक इस रूट के 40 फीसदी मार्ग पर मालगाड़ी की आवाजाही शुरू हो जाएगी।

प्रयागराज के व्यापारी बोले- कारोबार के लिए वरदान साबित होगा कारीडोर

  • इस कॉरिडोर के बनने से व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिल जाएगी। अलग रूट होने की वजह से सामानों की आवाजाही में समय कम होगा। इंडस्ट्रियल कारपोरेशन अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा का कहना है कि माल की ढुलाई के लिए अलग कॉरिडोर तैयार होने से हम अपने सामानों को प्रदेश और देश के कोने कोने में पहुंचाने में और सक्षम हो जाएंगे। कम समय में अधिक से अधिक सामान पहुंचेंगे। इससे इनकी डिलीवरी में भी सरलता होगी।
जितेंद्र शर्मा।

जितेंद्र शर्मा।

  • नैनी व्यापार मंडल के महामंत्री घनश्याम जायसवाल का कहना है कि व्यवसायिक गतिविधियों में यह कॉरिडोर वरदान साबित होगा। इससे आम आदमी को भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा पैसेंजर ट्रेनों की लेटलतीफी पर भी लगाम लगेगी।
घनश्याम जायसवाल।

घनश्याम जायसवाल।

  • कारोबारी राकेश कुमार जायसवाल का कहना है कि केंद्र सरकार की कृषि नीति में जिस तरह से किसानों को देश एवं प्रदेश के अन्य शहरों और राज्यों में अपने अनाज की सप्लाई करने की छूट मिली है। उसमें इस तरह के व्यवस्था सार्थक साबित होगी और किसानों के लिए मददगार होगी।
राकेश कुमार जायसवाल।

राकेश कुमार जायसवाल।

कंट्रोल सेंटर की 9 प्रमुख बातें-

  • कंट्रोल रूम में 11*5 मीटर की कुल चार अलग-अलग LED स्क्रीन रहेगी।
  • पंजाब से बंगाल तक कहां-कहां हैं गुड्स ट्रेनें, सभी जानकारी स्क्रीन पर रहेगी।
  • कंट्रोल रूम से संबंधित रूट के हर स्टेशन, सेक्शन और सिग्नल पर नजर रहेगी।
  • कंट्रोल रूम की विधिवत शुरूआत के बाद हर शिफ्ट में 50 से ज्यादा कर्मचारी पोस्ट होंगे।
  • 13,030 वर्ग मीटर का कुल निर्मित क्षेत्र, 4.20 एकड़ भूमि पर विकसित किया गया।
  • ट्रेन संचालन के लिए विश्व स्तर पर अपनी तरह के सबसे आधुनिक भवनों में से एक है ये भवन।
  • सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन के साथ ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग भी तय है।
  • 90 मीटर से अधिक की वीडियो दीवार के साथ 1560 वर्ग मीटर का एक थियेटर है।
  • अलस्टॉम द्वारा विकसित यह मेक-इन-इंडिया का उदाहरण है।

EDFC के सात बोर्ड नियंत्रण खंड

  • न्यू दानकुनी-न्यू गोमो (282 किमी, 09 स्टेशन)
  • न्यू गोमो-न्यू सोननगर (258 किमी, 07 स्टेशन)
  • न्यू सोननगर-न्यू डीडीयू (129 किमी, 8 स्टेशन)
  • न्यू डीडीयू-न्यू भाउपुर (382 किमी, 12 स्टेशन)
  • न्यू भाउपुर-न्यू खुर्जा (362 किमी, 11 स्टेशन)
  • न्यू खुर्जा-न्यू पिलखनी (230 किमी, 22 स्टेशन)
  • न्यू पिलखनी-न्यू चौपाल (168 किमी, 13 स्टेशन)



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By Raj

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