प्रयागराज15 मिनट पहले

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हाईकोर्ट ने कहा- पुलिस द्वारा किसी भी तरह के मांस की बरामदगी के बाद उसकी सच्चाई का पता लगाए या फॉरेंसिक प्रयोगशाला में टेस्ट कराए बिना ही बता दिया जाता है बीफ यानी गाय का मांस है।

  • गोहत्या निवारण कानून के तहत शामली के एक आरोपी को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया है।
  • इलाहाबाद हाइकोर्ट ने शामली जिले के रहमू उर्फ़ रहमुद्दीन की जमानत अर्जी मंज़ूर करते हुए ये टिप्पणी की

प्रयागराज. उत्तर प्रदेश में गो हत्याओं की रोकथाम के लिए बनाए गए उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि यूपी में इसका दुरुपयोग हो रहा है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस एक्ट में आरोपी बनाकर बेगुनाहों को भी जेल भेज दिया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि लोग ऐसे अपराध में जेल भेजे जा रहे हैं, जो अपराधी नहीं है। गो हत्या निवारण कानून के तहत शामली के एक आरोपी को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया है।

शामली के रहमुद्दीन को जमानत देते समय हाइकोर्ट ने की टिप्पणी

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने शामली जिले के रहमू उर्फ़ रहमुद्दीन की जमानत अर्जी मंज़ूर करते हुए ये टिप्पणी कीं। याचिकाकर्ता के खिलाफ शामली के थाना भवन में गौ हत्या निवारण अधिनियम 1955 के तहत केस दर्ज किया था। गत पांच अगस्त से आरोपी जेल में हैं, जबकि इसकी क्रिमिनल हिस्ट्री सिर्फ एक मुकदमे की ही है।

कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में गायों की देखरेख और गोशालाओं में बेहतर सुविधा के भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। गोशालाएं सिर्फ दुधारू गायों को ही रखने में दिलचस्पी दिखा रही हैं। बूढ़ी और बीमार के साथ ही दूध न देने वाली गायों को लोग सड़कों पर आवारा छोड़ देते हैं और गोशालाएं भी इन्हे नहीं रखती हैं।

किसानों की गाढ़ी कमाई बर्बाद कर रहीं छोड़ी गई गाये, सड़क हादसे की भी बन रहीं वजह

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गोशालाओं के बाहर घूमने वाली गायें किसानों की फसलों को बर्बाद कर रही हैं। किसानों को पहले सिर्फ नीलगायों से खतरा था, अब आवारा गायों से भी है। बाहर सड़कों पर घूमने वाली गायें ट्रैफिक और लोगों के जीवन के लिए भी खतरा पैदा करती हैं। आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और पुलिस के डर की वजह से दूसरे लोग भी इन्हे न तो अपने साथ रखते हैं और न ही राज्य से बाहर भेजने की हिम्मत जुटा पाते हैं। कोर्ट ने कहा कि गायों का परित्याग समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। गायों को उनके मालिकों के साथ रहने या फिर गोशालाओं में रखे जाने के नियम होने चाहिए। हाईकोर्ट ने अपने इसी निष्कर्ष के आधार पर आरोपी को जमानत दी।

जस्टिस सिद्धार्थ की सिंगल बेंच ने ये फैसला सुनाते हुए कहा कि अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान होने के बावजूद लोग लंबे समय तक जेल में रहते हैं। किसी भी तरह के मांस की बरामदगी के बाद उसकी सच्चाई का पता लगाए या फॉरेंसिक प्रयोगशाला में टेस्ट कराए बिना ही बता दिया जाता है बीफ यानी गाय का मांस है।



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By Raj

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