एक घंटा पहले

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इंग्लैंड के लिमिटेड ओवर क्रिकेट टीम के कप्तान इयोन मॉर्गन ने बायो-बबल में क्रिकेट को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर बायो-सिक्योर माहौल में क्रिकेट से खिलाड़ियों की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ रहा हो, तो उसे किसी दौरे से अपना नाम वापस लेने की आजादी मिलनी चाहिए।

कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में खेल पर ब्रेक लगा दिया था। इसके बाद वेस्ट इंडीज ने इंग्लैंड का दौरा कर 3 टेस्ट मैचों की सीरीज खेली थी। उसके बाद से खिलाड़ियों को यूएई में चल रहे इंडियन प्रीमियर लीग सहित सभी टूर्नामेंटों के दौरान बायो-सिक्योर माहौल में सीमित कर दिया गया।

10-12 महीने तक बबल में रहना एक चुनौती
आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी कर रहे मॉर्गन ने कहा कि हमने गर्मियों के अपने सारे इंटरनेशनल प्रोग्राम पूरे किए। उन्होंने कहा कि 10-12 महीने तक बबल में रहना चैलेंजिंग है। आप एक खिलाड़ी को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से ड्रिल कर सकते हैं और यह अत्यधिक दबाव का कारण बनता है, जिसे कोई देखना नहीं चाहता। इंग्लैंड ने वेस्ट इंडीज, पाकिस्तान, आयरलैंड और ऑस्ट्रेलिया की सीरीज होस्ट की थी। सारे मैच मैनचेस्टर और साउथैंप्टन में खेले गए थे।

लोगों को अपना नजरिया बदलना होगा : मॉर्गन
मॉर्गन ने कहा कि हमने एक टीम के रूप में इस बारे में बात की है और हमने स्वीकार किया है कि अगर उन्हें लगता है कि यह उनके मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर रहा है, तो वह इस बबल के अंदर और बाहर आएंगे।
उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि लोगों को इसे दूसरी तरह से देखना चाहिएद। उन्हें ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि वे लोग अपना काम नहीं कर रहे हैं या अपने देश के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं।

होल्डर बोले- यह काफी चैलेंजिंग
वेस्ट इंडीज के टेस्ट कैप्टन और सनराइजर्स हैदराबाद के ऑलराउंडर जेसन होल्डर ने एक बबल से दूसरे बबल में जाने के बारे में कहा कि यह काफी डिमांडिंग और चैलेंजिंग है। उन्होंने कहा कि अग आप शेड्यूल देखेंगे, तो यह बिल्कुल भी आसान नहीं है। वाकई में हम एक बबल से दूसरे बबल में जा रहे हैं। कुछ जगह परिवार को स्वीकार करते हैं, कुछ जगह नहीं। ऐसे में अपने परिवार से दूर रहना काफी मुश्किल हो जाता है।



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By Raj

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