MIT के डीन चंद्राकसन बोले- संस्थान के ग्रेजुएट स्कूल से रिजेक्ट हुआ, कुछ साल बाद वहीं फैकल्टी बना, फिर डीन


  • Hindi News
  • National
  • Anant P. Chandrakasan, Dean Of MIT, An Apex Engineering Institute, Said Rejected From MIT’s Graduate School, After A Few Years He Became A Faculty There; Dean Again

10 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

भारतीय मूल के अनंत पी. चंद्राकसन एमआईटी, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डीन हैं।

दुनिया का टॉप टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के बीच टॉकिंग पॉइंट है। भारतीय मूल के अनंत पी. चंद्राकसन एमआईटी, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डीन हैं। पहली बार उन्होंने हिंदी प्रिंट मीडिया को इंटरव्यू देते हुए बताया कि वे खुद भी एमआईटी से रिजेक्ट हुए, लेकिन आज इसी संस्थान के डीन हैं। एमआईटी के 159 साल के इतिहास में अनंत दूसरे भारतीय डीन हैं। अनंत ने भास्कर संवाददाता पूजा शर्मा से अपने रिजेक्शन से लेकर सक्सेस तक की कहानी साझा की। साथ ही बताया कि मार्क्स और स्किल में क्या ज्यादा अहम है। पढ़िए इंटरव्यू के अंश…

सवाल- टॉप संस्थान का डीन होना कैसा है?
जवाब- मैं सम्मानित महसूस करता हूं। अत्याधुनिक रिसर्च और एजुकेशन, जिसका नेतृत्व हमारी शानदार फैकल्टी, स्टूडेंट्स और स्टाफ करते हैं, उसे सहयोग और मजबूती देना वाकई एक बेहतरीन अनुभव है।

सवाल- क्या एमआईटी ने रिजेक्ट किया था?
जवाब- हां। उस समय मैं यूसी बर्कले में अंडरग्रेजुएट था और मैंने एमआईटी के ग्रेजुएट स्कूल के लिए अप्लाय किया था। मुझे लगा एमआईटी में एडमिशन के लिए मेरी स्थिति मजबूत है लेकिन मैं निराश हुआ जब एमआईटी ने मुझे रिजेक्ट कर दिया। मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे यूसी बर्कले के ग्रेजुएट स्कूल में प्रवेश मिल गया। जब बर्कले से ग्रेजुएट होने के बाद पीएचडी कर ली तो फैकल्टी के लिए अप्लाय किया। एमआईटी में भी इंटरव्यू दिया हालांकि इस जॉब के लिए मैं उनका टॉप कैंडिडेट नहीं था। फिर भी मुझे एमआईटी से ऑफर लेटर मिला, उसके बाद जो कुछ भी हुआ, वह सब इतिहास है।

सवाल- संघर्ष से कैसे जीता जाए?
जवाब- जिंदगी उतार-चढ़ावों से भरी है। बुरे दौर में आपको सकारात्मक बने रहने और व्यक्तिगत और पेशेवर नेटवर्क्स के सहयोग की जरूरत होती है। व्यक्तिगत सफलता के साथ दूसरों को सफल होने में मदद करना भी अहम है।

सवाल- सबसे बड़ी सफलता क्या रही?
जवाब- आईईईई आईएसएससीसी की 60वीं एनिवर्सरी पर मुझे सबसे ज्यादा पब्लिकेशंस के ऑथर होने के कारण सम्मान मिला। आईएसएससीसी चिप डिजाइन फील्ड की प्रीमियर कॉन्फ्रेंस है। 9 साल के लिए मैं इसका क्रॉन्फ्रेंस चेयर रहा।

सवाल- मार्क्स व स्किल्स में क्या अहम है?
जवाब- एकेडमिक परफॉर्मेंस जरूरी है लेकिन उसके साथ-साथ मैं मानता हूं कि क्रिएटिव माइंड, मार्क्स से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। स्किल्स की अहमियत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।



Source link

By Raj

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *