स्वेटर बुनने के रोचक तथ्य: ठंड में मूड बूस्ट करने का सबसे अच्छा तरीका ऊन की बुनाई, इससे स्ट्रेस भी घटता है


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20 मिनट पहले

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फिनलैंड में हुए एक सर्वे के मुताबिक, ऊन की बुनाई हेक्टिक लाइफस्टाइल और ऑफिस के स्ट्रेस को कम करती है।

बचपन में नानी, दादी या मां को ऊन की बुनाई करते देखा होगा। उन्होंने कभी आपके लिए भी स्वेटर या स्कार्फ बुने होंगे। लेकिन, समय के साथ रेडीमेड ऊनी सामान मार्केट में आने के बाद घर पर ऊनी कपड़े बुनना कम हो गया है। लेकिन, ऊन की बुनाई ठंड में सबसे अच्छी एक्टिविटी है। कई स्टडी में इसके फायदों को लेकर दावा किया गया है। जैसे- यह आपके शरीर के किसी पुराने दर्द को ठीक करती है। वहीं, यह आपकी मेंटल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है।

कोरोना के चलते घर पर लोगों का ज्यादा वक्त बीत रहा है। सोशल एक्टिविटीज से भी दूरी रखी जा रही है। ऐसे में ऊन की बुनाई अलग तरह की खुशियां देती है। फिनलैंड में हुए एक सर्वे के मुताबिक, ऊन की बुनाई हेक्टिक लाइफस्टाइल और ऑफिस के स्ट्रेस को कम करती है। ऊन से बुनाई के लिए कोई खास औजार भी नहीं चाहिए। इसके लिए आपको केवल ऊन और सलाई (नीडल) की जरूरत होगी।

भारत दुनिया में ऊन का 9वां बड़ा उत्पादक

देश की बात करें, तो भारत ऊन प्रोडक्शन के मामले में दुनिया का 9वां बड़ा देश है। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे यहां दुनिया के कुल ऊन प्रोडक्शन का 2% पैदा होता है। भारत में ऊन इंडस्ट्री पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में है। अकेले पंजाब में देश का 35% ऊन प्रोडक्शन होता है।

ऊन से जुड़े इंटरेस्टिंग फैक्ट्स

  • ऊन में केरॉटिन प्रोटीन होता है। इसी प्रोटीन से बाल, नाखून, चिड़ियों के पंख और जानवरों के सींग बनते हैं। इसी वजह से कई बार ऊनी कपड़ों में कीड़े लग जाते हैं। यह प्रोटीन कीट-पतंगों के लिए भोजन का काम करता है।
  • असली ऊन में केराटिन प्रोटीन और धागे में पानी होने की वजह से आग भी नहीं लगती है। ज्यादातर ऊन सफेद, काले और भूरे रंग के होते हैं। रंगीन ऊन पुरानी नस्ल की भेड़ों से मिलते हैं, इससे कालीन बुनी जाती है।
  • स्प्रिंग के मौसम में उतारी गई ऊन बाकी सभी किस्म की ऊन से ज्यादा सॉफ्ट होती है। इस तरह के ऊन का कलर भी सफेद होता है।
  • ऊन के रेशों की थिकनेस को माइक्रोन से मापा जाता है। एक माइक्रोन का मतलब 1/1000 mm है। इसकी थिकनेस 10 से 70 माइक्रोन होती है। ऊन कई सेल्स से मिलकर बनती है, जो एक दूसरे से चिपकी होती है।
  • हवा में नमी होने की वजह से इसके रेशों से गर्माहट निकलती है। एक ग्राम ऊन में नमी होने पर 27 कैलोरी गर्मी निकलती है। सूखी ऊन 30% तक नमी सोख सकती है। सबसे महंगी ऊन वेकुना होती है। इसकी कीमत 1300 से लेकर 3000 अमेरिकी डॉलर प्रति पाउंड तक है।
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ऊन की बुनाई करने से मिलती है खुशी

  • मिशिगन के एक कम्युनिटी कॉलेज की डीन एमी रेडिंगर कहती हैं कि मार्च में कैंपस बंद होने के बाद उन्होंने ऊन की बुनाई शुरू की। इस दौरान उन्होंने एडवांस टेक्नीक के साथ शॉल बुनने का फैसला किया। इस दौरान उनका एक्सपीरियंस मिलाजुला रहा। कई बार उन्हें इस काम से दुख पहुंचा और कई बार खुशी भी महसूस हुई। रेडिंगर की मानें तो उनके लिए यह एक अच्छी इमोशनल प्रोसेस थी। वह बुनाई के काम को एक चैलेंज के तौर पर लेती है।
  • रेडिंगर का कहना है कि ऊन की बुनाई करने वाले लोग दो तरह के होते हैं। पहले वे जो स्वेटर, विंटर कोट और आने वाले बच्चे के लिए बुनाई करते हैं। दूसरे वह होते हैं, जो प्रोसेस पर फोकस करते हैं। इसमें वह स्ट्रेसफुल लाइफ से छुटकारा चाहते हैं। ऐसे लोग इस काम में क्रिएटिविटी दिखाते हैं। वे इसमें अच्छी चीजों को इंजॉय करते हैं।
  • रेडिंगर कहती हैं- ऊन की बुनाई को मेडिटेशन की तरह लेना चाहिए। इससे आप खुशी महसूस करेंगे और अपना मेंटल प्रेशर कम कर सकेंगे। यह प्रोसेस आपके बार-बार खाने की आदत पर भी कंट्रोल कर सकती है। यह आपको स्ट्रेस से दूर रखती है।
  • कोई काम जब आपको आउटपुट दे, तो यह आपको मोटिवेट करता है। यह एक बोनस की तरह होता है। ऊन की बुनाई करने से आप सिर्फ मेंटल प्रोसेस से नहीं गुजरते हैं, बल्कि इस काम को पूरा करने के बाद आपको कुछ आउटपुट भी मिलता है। इस काम के जरिए अच्छा स्वेटर, स्कार्फ, या बच्चों के लिए ब्लेंकेट तैयार कर सकते हैं।
  • कैनेडियन सॉफ्टवेयर डेवलपर रूही कहती हैं कि उन्होंने कोरोना के समय अपने दोस्तों के कहने पर ऊन की बुनाई शुरू की। इससे पहले वह अपना समय एक म्यूजिक बैंड के साथ बिताती थीं। कोरोना के समय घर पर भी म्यूजिक के काम को जारी रखा, लेकिन कुछ दिनों बाद वह अकेलापन महसूस करने लगी। इसके बाद उन्होंने ऊन की बुनाई का काम शुरू किया। इसमें खूब मजा आया। यह उनकी मेंटल प्रोसेस के लिए भी फायदेमंद साबित हुआ।
  • रूही कहती हैं कि उन्होंने ज्यादातर चीजें लोगों के लिए तैयार की थी। वह कहती हैं कि जब हम किसी के लिए कुछ बुन रहे होते हैं, जिससे हमारा पर्सनल अटैचमेंट रखते हैं, तो बुनाई करते में हर स्टिच पर उस शख्स के बारे में सोचते हैं। ये आपके अकेलेपन को भी दूर रखने में मदद करती है।

ग्रुप बनाकर करें ऊन की बुनाई

हालांकि, ऊन की बुनाई करना एक शख्स का काम है, लेकिन कुछ लोग इसे ग्रुप एक्टिविटी के तौर पर करना पसंद करते है। इस दौरान वे एक दूसरे से बात भी करते हैं, और नई टेक्नीक भी सीख लेते हैं। यह ऐसा काम नहीं है जिस पर फोकस बनाए रखना होता है। आप इसे लोगों से बात करते हुए भी कर लेते हैं।

ऊन की बुनाई को ऐसे करें शुरू

  • सबसे पहले तय करें कि आपको स्वेटर, स्कार्फ में से क्या बनाना है, इसके बाद उसकी डिजाइन तैयार करें। डिजाइन के हिसाब से कलरफुल ऊन खरीदें। इस बात का ध्यान रखें कि बच्चों, लड़के-लड़कियों के लिए ऊन का कलर अलग हो।
  • ऊन हमेशा ज्यादा खरीदें, इससे आपको परेशान नहीं होना पड़ेगा। अगर ऊन बच भी जाता है तो उसका यूज अलग काम में हो सकता है। ऊन का कलर पक्का है या कच्चा इसके लिए उसे कपड़े पर रगड़कर देखें।
  • बुनाई करते वक्त आधी बुनाई न छोड़ें। अगर जरूरी काम के लिए ऊठ भी रहे हैं, तो बुनाई का एक फंदा खोल लें और नए तरह से उसकी बुनाई करें।
  • बुनाई करते समय रूम की लाइट सही रखें। कम रोशनी में आंखों पर असर पड़ता है। स्वेटर की गले की बॉर्डर 10 नंबर और 12 नंबर की सलाई से बंद करें। डिजाइन डालते वक्त मोटी सलाई का उपयोग करें। इससे बुनाई अच्छी होगी।
  • सलाई अच्छी क्वालिटी की होनी चाहिए। छोटी सलाई से स्वेटर बुना जाता है, और लंबी सलाई से शॉल और स्टॉल बुनते हैं। गला बनाने के लिए दोनों तरह की सलाइयों का यूज करें।



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By Raj

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