बजट में गहलोत का शायराना अंदाज: बजट के दौरान कभी विरोधियों तो कभी अपनों पर ताना; बोले- हवाओं ने बहुत कोशिश की, मगर चिराग आंधियों में भी जलते रहे


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जोधपुर5 घंटे पहलेलेखक: सुनील चौधरी

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को बजट भाषण में खूब शेरो-शायरी की। सियासत के जादूगर कहे जाने वाले गहलोत ने कभी विपक्षी नेताओं पर तो कभी सरकार गिराने का दांव खेल चुके अपने ही लोगों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इशारों-इशारों में ही पार्टी आला कमान को भी संदेश दे दिया। भाषण के दौरान गहलोत ने बेहद सधी हुई लाइनों के जरिए अपनी बात पूरी की। उन्होंने शेर भी पढ़े तो संस्कृत के श्लोकों और मोटिवेशनल बातों के जरिए भी अपना मैसेज दिया। गहलोत की ऐसी ही 8 बातें पढ़िए-

1.
पलट देते हैं हम मौजे-हवादिस अपनी जुर्रत से
कि हमने आंधियों में भी अकसर चिराग जलाए हैं।

स्वतंत्रता सेनानी रामप्रसाद बिस्मिल के इस कथन को याद करते हुए गहलोत ने भाजपा नेतृत्व पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि आपने मेरी सरकार गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन यह कर्नाटक या पुडुचेरी नहीं है।

2.
उद्यमेन हि सिद्धयन्ति, कार्याणि न मनोरथै: अर्थात कार्य परिश्रम से ही सफल होते हैं, मन में सोचने से नहीं। इसी भावना के साथ हमारी सरकार ने मेहनत में कोई कमी नहीं रखी चाहे परिस्थिति कैसी भी हो।

इसके जरिए गहलोत ने सचिन पायलट समेत पार्टी आलाकमान को यह बताने की काेशिश की कि सत्ता में बने रहने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी।

3.
भारत एक प्राचीन देश है, लेकिन युवा राष्ट्र है
मैं भी युवा हूं और मेरा भी एक सपना है।

इसके जरिए गहलोत ने संदेश दिया कि कोई यह नहीं सोचे कि वे बुजुर्ग हो गए हैं। गहलोत ने कहा भी- चंद दिन पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि जिसमें नया करने की क्षमता नहीं है, वह बुजुर्ग है। राजीव गांधी के कथन को याद कर इशारा किया कि उम्र मुझ पर हावी नहीं है। मैं विचारों से अभी एकदम युवा हूं और लंबी पारी खेलने को तैयार भी हूं।

4.
सपने वो नहीं जो आप नींद में देखें
सपने वो हैं जो आपकी नींद ही उड़ा दें।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की इन लाइनों में गहलोत का इशारा शायद सचिन पायलट और केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत पर था। शायद वे कहना चाहते हैं कि आपने मेरी सरकार गिराने के सपने तो देख लिए, लेकिन आधे-अधूरे प्रयास ही कर पाए।

5.
हम में से सभी महान कार्य नहीं कर सकते हैं
लेकिन हम छोटी-छोटी चीजें अधिक प्रेम से कर सकते हैं।

मदर टेरेसा की इन लाइनों को याद करते हुए गहलोत ने एक बार फिर सचिन पायलट की तरफ दोस्ती बढ़ाने का संदेश दिया। इन पंक्तियों के जरिए गहलोत शायद कहना चाह रहे हैं कि मुख्यमंत्री तो एक ही बन सकता है। आप प्रदेशाध्यक्ष थे। हम मिलकर छोटे-छोटे कार्यों को बड़े कार्य में बदल सकते थे।

6.
संभव की सीमा जानने का एक ही तरीका है
असंभव से भी आगे निकल जाना।

स्वामी विवेकानंद की इन पंक्तियों को याद कर गहलोत पार्टी के बागी नेताओं को संदेश देने में कामयाब रहे कि उनकी क्षमता पर संदेह किया जाना ठीक नहीं है।

7.
मेरे हौसलों में अभी जान बाकी है,
ये तो दौड़ भर थी, अभी उड़ान बाकी है।
मेरी सादगी से मेरे बारे में अंदाजा मत लगाना,
ये तो शुरुआत भर थी अंजाम अभी बाकी है।

इन पंक्तियों से गहलोत ने पार्टी के नेताओं को संदेश दिया कि कांग्रेस का भविष्य अब गहलोत है। मैं कम जरूर बोलता हूं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं कुछ जानता नहीं हूं। मैं अब भी और आगे भी महत्वपूर्ण भूमिका में ही नजर आऊंगा।

8.
निगाहों में मंजिल थी,
गिरे और गिर कर संभलते रहे।
हवाओं ने बहुत कोशिश की,
मगर चिराग आंधियों में भी जलते रहे।

गहलोत ने इन लाइनों के जरिए अमित शाह समेत सभी विरोधियों और बागी नेताओं को फिर नसीहत दी कि आप सभी ने मिलकर मेरी सरकार गिराने की पूरी कोशिश कर ली, लेकिन आंधियों में भी जलने वाले चिराग की तरह मैं पद पर बना हुआ हूं।



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By Raj

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