पूर्व सीएम ने कहा- कश्मीर में 370 की वापसी तक तिरंगा नहीं उठाऊंगी, ना चुनाव लड़ूंगी


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श्रीनगर18 मिनट पहले

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अपने घर में की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महबूबा ने कश्मीर के ध्वज की ओर इशारा करते हुए कहा कि तिरंगे से हमारा रिश्ता इस झंडे से अलग नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र ने शुक्रवार को बिहार में पहली चुनावी रैली की, लेकिन यहां पर भी बात कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की कही। इसे मुद्दा भी बनाया और इसी पर वोट भी मांगा। कुछ ही देर बाद कश्मीर में 370 लागू करने के लिए विरोधियों के साथ गठबंधन बनाने वाली महबूबा मुफ्ती ने मोदी को चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा कि कश्मीर में आर्टिकल 370 की वापसी होने तक वे तिरंगा नहीं उठाएंगी और न ही चुनाव लड़ेंगी।

महबूबा ने जम्मू-कश्मीर के झंडे की ओर इशारा करते हुए कहा कि तिरंगे से हमारा रिश्ता इस झंडे से अलग नहीं है। और, जब यह झंडा हमारे हाथ में आ जाएगा, तभी हम तिरंगे को उठाएंगे।

‘मोदी पर भरोसा करने का पछतावा’

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें भाजपा के साथ गठबंधन करने का कोई अफसोस नहीं है। महबूबा ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी पर विश्वास करने का पछतावा है। वह ऐसी पार्टी से हैं, जिसका अटल बिहारी वाजपेयी भी हिस्सा थे। उन्हें बिहार में वोट हासिल करने के लिए अनुच्छेद-370 का सहारा लेना पड़ रहा है। वह जब भी नाकाम होने लगते हैं तो वे कश्मीर और 370 जैसे मुद्दे उठाते हैं। वास्तविक मुद्दों पर वह बात ही नहीं करना चाहते।

मैनिफेस्टो के हिसाब से संविधान बदलना चाहती थी बीजेपी

14 महीने की नजरबंदी से रिहा होने के बाद अपने घर में की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में महबूबा ने कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी देश के संविधान को अपनी पार्टी के घोषणापत्र के हिसाब से बदलने की कोशिश कर रही थी।

हमारी लड़ाई अनुच्छेद-370 की बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए भी है। कश्मीर मुद्दे से कोई भी अपनी आंखें नहीं मूंद सकता। जो ये सोचते हैं कि हम आर्टिकल-370 को भूल गए हैं वे गलतफहमी में जी रहे हैं। यहां के लोगों ने इसके लिए बहुत से बलिदान दिए हैं। हम उनके बलिदान को बेकार नहीं जाने देंगे।

‘जरूरत पड़ी तो सबसे पहले खून दूंगी’

महबूबा ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो नेताओं के बीच वह अपना खून देने वाली पहली व्यक्ति होंगी। हम (नेता) एकजुट हैं और लोगों को भी एकजुट होकर लड़ना चाहिए। यह डॉ. फारूख अब्दुल्ला, सज्जाद लोन या किसी और नेता की नहीं, सभी की लड़ाई है। धारा-370 को निरस्त कर दिया गया था, इसलिए सरकार ने सभी जनविरोधी फैसले लेकर लोगों की भावनाओं को आहत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वे जम्मू और कश्मीर के लोगों को नहीं चाहते हैं।

चुनाव से कोई लेना-देना नहीं

चुनाव लड़ने के बारे में उन्होंने कहा कि महबूबा का चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, उन्होंने अपनी बात में यह जोड़ा कि पार्टी के नेता और सहयोगी दलों के साथी एक साथ बैठेंगे और उसी के अनुसार कोई निर्णय लेंगे।

गिलानी के कदम को बताया भूल

हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के केंद्र के प्रतिनिधिमंडल के साथ बात करने से इनकार करने के बारे में पूछे जाने पर महबूबा ने कहा कि इससे भारी नुकसान हुआ। वह भाजपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल नहीं था। यदि गिलानी बात करने के लिए तैयार नहीं थे, तो उन्हें कम से कम उन्हें घर में आने की इजाजत देनी चाहिए थी। उनके इस कदम से कश्मीर की एक अलग तस्वीर सामने आई थी।



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By Raj

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