गर्भ में बच्चे का ख्याल रखना जरूरी: रिसर्च में दावा- बर्थ डिफेक्ट है तो बचपन से ही कैंसर का खतरा


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एक घंटा पहले

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बच्चे में बर्थ डिफेक्ट हैं, बच्चा स्वस्थ तो है न ? अक्सर आपने किसी न किसी को इस तरह के सवाल पूछते सुना होगा। प्रेग्नेंसी के समय 40 सप्ताह तक भ्रूण में कई बदलाव होते हैं। इस दौरान बच्चे का विकास सही से नहीं हो पाता। यह बर्थ डिफेक्ट की बड़ी वजह बन सकता है।

WHO की एक रिपोर्ट की मानें तो भारत में हर साल 7% बच्चे बर्थ डिफेक्ट के साथ पैदा होते हैं। 3.3 करोड़ बच्चे पांच साल की उम्र के पहले दम तोड़ देते हैं। अमेरिका के हुए एक शोध में सामने आया कि जिन बच्चों में बर्थ डिफेक्ट होता है, उनमें कैंसर का खतरा भी सबसे ज्यादा रहता है। एडल्ड हुड में इसका रिस्क रेट कम हो जाता है, लेकिन जोखिम बना रहता है।

बर्थ डिफेक्ट होने का कारण

  • बर्थ डिफेक्ट भ्रूण में जेनेटिक और नॉन जेनेटिक वजह से होता है। अगर पैरेंट्स में किसी एक को जेनेटिक समस्या है तो इसका खतरा बढ़ जाता है। बर्थ डिफेक्ट में फैमिली हिस्ट्री का ध्यान भी रखा जाता है। इस दौरान कुछ जरूरी टेस्ट भी किए जाते हैं।

बर्थ डिफेक्ट में होने वाली समस्या

  • डाउन सिंड्रोम: इसे ट्राइसोमी 21 भी कहते हैं। अगर भ्रूण में माता-पिता का क्रोमोजोम एक्सट्रा आ जाए, तो बच्चे को डाउन सिंड्रोम हो सकता है। बच्चे के दिमाग और शारीरिक विकास में कमी आ जाती है। महिलाओं के 35 साल की उम्र में मां बनने पर इस तरह की समस्या होती है।
  • ट्राईसोमी 18: इस समस्या में शरीर के अंग का विकास नहीं होता। बच्चे का वजन कम रहता है। हार्ट की परेशानी रहती है।
  • क्लब फुट: इसमें बच्चे के पैर अंदर मुड़ जाते हैं। स्ट्रेचिंग, एक्सरसाइज और सर्जरी से इसका इलाज किया जा सकता है। इसकी वजह फैमिली हिस्ट्री भी रहती है।
  • सिस्टिक फाइब्रेसिस: इसमें डाइजेशन सिस्टम और फेफड़ों को नुकसान होता है। डाइजेशन में पेनक्रियाज, लिवर पर असर पड़ता है।

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नए शोध में दावा- बर्थ डिफेक्ट है तो बढ़ जाता है कैंसर का खतरा

  • अमेरिका में हुई एक रिसर्च में सामने आया कि बर्थ डिफेक्ट से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। एडल्टहुड तक में रिस्क रेट कम हो जाता है। शोधकर्ताओं ने बर्थ और हेल्थ रिकॉर्ड इकट्ठा किए। इसमें नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क के 62, 295 कैंसर के मरीज शामिल हुए। सभी की उम्र 46 साल से ज्यादा नहीं थी। इनकी तुलना 724,542 लोगों से की, जिन्हें कैंसर नहीं था।
  • इसमें सबसे ज्यादा कैंसर की मरीज वे थे, जिनमें बर्थ डिफेक्ट था। सामने आया कि जेनेटिक बर्थ डिफेक्ट वाले 74% मरीज को कैंसर का खतरा रहा और जिनमें जेनेटिक बर्थ डिफेक्ट नहीं था, उनमें 54% कैंसर का खतरा था।
  • BMJ के शोध के मुताबिक, जो खतरे सामने आए, वह कई प्रकार के हैं। जैसे- जो न्यूरल डिफेक्ट के साथ पैदा होते हैं, उनमें 5 गुना कैंसर का खतरा रहता है। जो बच्चे डाउन सिंड्रोम डिफेक्ट के साथ पैदा होते हैं, उनमें 6 गुना कैंसर का खतरा रहता है। जिनमें क्लेफ पेलेट का बर्थ डिफेक्ट रहता है, उनमें किसी तरह का खतरा नहीं रहता है।

बर्थ डिफेक्ट से बचा जा सकता है?

  • गर्भधारण से पहले थाइरॉइड, शुगर, बीपी का चेकअप कराना चाहिए। जिनमें पहले से किसी तरह की बीमारी है, उन्हें प्रेगनेंसी के पहले डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। अगर गर्भ धारण हो गया है तो डॉक्टर को इससे जुड़ी सारी जानकारी दें। इसमें डॉक्टर दवाई बदल सकते हैं। डाइट से लेकर लाइफस्टाइल भी इस समय सही रखना चाहिए।



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By Raj

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