आइसोलेशन कितने दिन तक: क्या आइसोलेशन का समय कम कर देना चाहिए? जानें एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों की राय


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2 घंटे पहले

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कोरोना मरीजों के आइसोलेशन का समय तय करने को लेकर कुछ रिसर्च के आधार पर एनालिसिस किया गया है। इसमें सामने आया है कि लोगों मेंं लक्षण सामने आने के 2 दिन पहले और 5 दिन बाद वायरस प्रभावी रहता है। यह भी सामने आया है कि गंभीर मरीज, जिनका इम्युन सिस्टम ठीक नहीं है, उन्हें कोरोना से रिकवर होने में 20 दिन से ज्यादा का समय लग सकता है।

कुछ एक्सपर्ट्स आइसोलेशन का समय कम करने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि अगर वायरस को फैलने से को रोकना है, तो हमें पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। कोरोना के शुरुआती स्टेज पर होम आइसोलेट रहकर इलाज किया जा सकता है।

सवाल यह है कि अगर संक्रमित लोगों की तरफ से सरकार को सहयोग मिल रहा है, तो क्या आइसोलेशन के समय को कम करना चाहिए? या फिर सरकार को संक्रमण पर काबू पाने के के लिए दूसरा विकल्प सोचना चाहिए ? अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन का मानना है कि संक्रमित लोगों को कम से कम 10 दिन तक आइसोलेट रहना चाहिए।

एक्सपर्ट्स और डॉक्टर की क्या राय है?

  • डॉ. शोविक और उनके साथियों ने 2003 से 2020 के बीच पब्लिश 1,500 स्टडी का एनालिसिस किया। इस दौरान उन लोगों का हेल्थ डेटा इकट्ठा किया गया, जो किसी न किसी वायरस से संक्रमित थे और अस्पताल में भर्ती हुए थे। 79 स्टडी के आधार पर तैयार डेटा में पाया कि लक्षण सामने आने के 2 और 5 दिन बाद तक वायरस प्रभावी रहता है। इसके अलावा वायरस का कुछ असर 17 दिनों तक मरीज के कान और नाक में रह सकता है। कई केस में यह समय 3 महीने भी हो सकता है। इसके अलावा 8 दिन तक कुछ मरीजों के फेफड़ों में वायरस का असर रह सकता है।
  • ब्राउन यूनिवर्सिटी के फिजिशियन डॉ. मेगन रेनी कहती हैं कि ऐसे मरीजों के आइसोलेशन का समय 5 दिन से ज्यादा का होना चाहिए। सीडीसी ने आइसोलेशन के समय को 10 से 14 दिन तक करने का सुझाव दिया है।
  • एक्सपर्ट्स की मानें तो आइसोलेशन के लिए 10 दिन बहुत ज्यादा समय है। इससे मरीजों की फाइनेंशियल कंडीशन पर भी असर पड़ता है। कई बार मरीज 10 दिन के पहले ही सेहतमंद महसूस करने लगता है।
  • डॉ. बैरेल कहते हैं कि MERS वायरस 7 से 10 दिन तक रह सकता है। SARS वायरस 10 से 14 दिन तक रह सकता है। SARS की तुलना में MERS को रोकना बहुत मुश्किल है। जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी में वॉयरोलॉजिस्ट एंजिला रैसमुसेन कहती हैं कि आइसोलेशन के समय को कम करना सही रहेगा। कई डॉक्टरों का मानना है कि 5 दिन आइसोलेट रहने से संक्रमण के फैलाव को नही रोका जा सकता।
  • इसके अलावा शोविक और दूसरे एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर शुरुआती लक्षण सामने आने के बाद आइसोलेट हो जाएं तो हम संक्रमण फैलने से रोक सकते हैं। इस पर डॉ.बेल का तर्क है कि आखिर लोग बिना जांच के कैसे जान पाएंगे कि उन्हें कोरोना है, क्योंकि शुरुआत में सर्दी, खांसी और वायरल फीवर की तरह ही कोरोना के लक्षण सामने आते हैं। डॉ. शोविक का कहना है कि पीसीआर टेस्ट से बीमारी का पता लगाया जा सकता है। इससे यह तय हो जाता है कि रेपिड एंटीजन टेस्ट कराना चाहिए या नहीं।

कई देशों में आइसोलेशन के समय को लेकर हुए बदलाव

  • फ्रांस ने आइसोलेशन का समय 14 दिन से घटाकर सात दिन कर दिया है। जर्मनी ने भी पांच दिन आइसोलेशन मे रहने की गाइडलाइन जारी की है। इसके अलावा सेंट एंड्रयू यूनिवर्सिटी के डिसीज एक्सपर्ट डॉ. म्यूग शोविक का मानना है कि आइसोलेशन के समय को घटाने के बाद तालमेल रखना जरूरी होगा। इसके लिए लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित कर सकते हैं।
  • इंग्लैंड के एक सर्वे में सामने आया है कि पांच में से एक आदमी को आइसोलेट होना जरूरी है। इस पर डॉ. शोविक का कहना है कि अगर हम जांच ज्यादा करें और लोगों को आइसोलेट नहीं कर सकते तो महामारी पर कंट्रोल करना मुश्किल है।
  • वहीं, अमेरिका में लोग बीमार होने के एक-दो दिन बाद भी टेस्ट नहीं करा रहे हैं। इस वजह से संक्रमण पर कंट्रोल करना मुश्किल है। अगर जांच नहीं होगी तो संक्रमण का पता नहीं चल सकेगा। समय पर आइसोलेट नहीं होने से संक्रमण बढ़ेगा।

होम रेपिड टेस्ट संक्रमण रोकने में मददगार

  • अन्य एक्सपर्ट्स की मानें तो होम रेपिड टेस्ट संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है। डॉ. रैने कहती हैं कि होम रेपिड टेस्ट कराने से कई फायदे हैं। एक तो समय पर बीमारी को पकड़ा जा सकता है। इसके बाद 5 दिन के लिए आइसोलेट हो सकते हैं।
  • डॉ. बैरेल कहते हैं कि होम आइसोलेशन सुरक्षित और बेहतर उपाय है। कई देशों ने इस पॉलिसी को अपनाया है। वियतनाम में होम आइसोलेट लोगों को सरकार की तरफ से आर्थिक मदद भी मिल रही है।
  • जापान में सरकार ने शुरुआती लक्षण आने के बाद 4 दिन घर से काम करने की इजाजत दी है। यहां मरीज फोन पर डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, वह होटल और हॉस्पिटल में आइसोलेट हो सकते हैं।
  • अन्य देशों में भी कोरोना के संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसमें मरीज घर पर आइसोलेट हो सकता है। मास्क पहनना जरूरी है।
  • आइसोलेशन को लेकर सभी के अपने- अपने तर्क है। इसे लेकर पूरी तरह से कोई दावा नहीं कर सकता है कि कितने दिन आइसोलेट रहना जरूरी है। इसलिए आइसोलेशन के समय को कम करने को लेकर सवाल ही नहीं उठता है। लेकिन अगर कुछ रिसर्च को आधार बनाया जाए। तो इतना तय है कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद 7 से 14 आइसोलेशन में रहना जरूरी है।



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By Raj

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