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23 मिनट पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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बेटे अध्ययन सुमन की आत्महत्या की झूठी खबर पर शेखर सुमन कानूनी कार्रवाई करने जा रहे हैं। वे वकील से मिलकर चर्चा करके लीगल एक्शन लेंगे। इस खबर को लेकर शेखर एक तरफ दुखी हैं तो दूसरी तरफ गुस्से में भी है। दैनिक भास्कर से बात करते हुए उन्होंने दिल की बात रखी।

किसी के जान के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते जर्नलिज्म इस हद तक नीचे गिर गया है कि लोग टीआरपी के लिए किसी की जान की परवाह तक नहीं करते। यह भी नहीं सोचते कि ऐसी खबर का उनके मां-बाप और परिवार पर किस तरह असर हो सकता है। इस तरह की शॉकिंग न्यूज से किसी की जान भी जा सकती है। उसकी भी परवाह नहीं करते। बेबुनियाद बात को आगे बढ़ा देते हैं। अगर ऐसा कुछ सुना था तो तब सबसे पहले घरवालों को फोन करना चाहिए कि इसमें सच्चाई है या नहीं। आज के जमाने में ऐसी खबरें और अफवाहें उड़ती रहती हैं। आप किसी के जान के साथ इस तरह से खिलवाड़ नहीं कर सकते। यह छोटी-मोटी बात नहीं है कि फिल्म साइन कर ली या फिल्म से निकल गए, यह गर्लफ्रेंड वाली बात नहीं है। यहां तो आपने किसी को मार ही दिया। जिस तरह का विषाक्त माहौल हो गया है। जिस तरह की रोज खबरें आ रही हैं। सुशांत सिंह राजपूत के साथ हुआ, यह किसी के साथ हो सकता है। कौन सा बच्चा किस प्रेशर में है, यह किसी को नहीं मालूम।

आपने नेस्तनाबूत कर दिया, अब कह रहे बिल्डअप कर देंगे
इस बात को अनसुना नहीं कर सकते। जिस समय मुझे यह खबर मिली, उस समय अध्ययन दिल्ली में था। उनका फोन स्विच ऑफ था। आप समझ सकते हैं कि जब तक उससे बात नहीं हो गई, तब तक क्या से क्या हो गया। लोगों के फोन आने लगे, कोहराम मच गया। जबकि जी न्यूज एक जिम्मेदार न्यूज चैनल है। अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि अभी फेक न्यूज बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे किसी की जिंदगी पर असर पड़ सकता है। फिर मैंने सबको ट्वीट किया और पीएमओ को भी टैग किया। अभी मैं एनबीए को एक ओपन लेटर भी लिखने वाला हूं। देखिए, मानहानि का दावा चलता रहेगा, लीगल प्रोसीजर भी चलते रहेंगे, लेकिन आपने जो नुकसान कर दिया, उससे और भी बड़ा नुकसान हो जाता। मान लीजिए कोई दुर्घटना हो जाती या किसी की तबीयत खराब हो जाती, तब उसका खामियाजा कौन भुगतता। आपके खाली सॉरी कह देने से नहीं चलता। कहीं न कहीं, एक जिम्मेदारी के साथ पत्रकारिता करते, इस तरह से शर्मनाक हरकत नहीं करते।

मैं तो यही कहना चाहूंगा कि इससे मीडिया हाउसेस एक सीख लें। एक खबर को बेचने के लिए आप किसी भी हद तक जा सकते हैं। उसके बाद एक माफीनामे से नहीं चलता। अब कह रहे हैं कि हम कुछ भी करने के लिए तैयार हैं, हमसे गलती हो गई। आप दुनिया भर का झांसा दे रहे हैं कि हम अध्ययन को बिल्डअप कर देंगे। अरे! बिल्डअप नहीं चाहिए। आपने उन्हें नेस्तनाबूत कर दिया तो अब हमें बिल्डअप नहीं चाहिए। वह अपना बिल्डअप खुद कर लेगा। आज आश्रम वेब सीरीज के बाद वह लड़का अपने पैरों पर खड़ा हुआ है कि उसने कुछ 10 वेबसीरीज साइन की है और तीन-चार फिल्में साइन की है।

उन पर मानहानि का दावा किया जाएगा
अध्ययन को भी शॉक लगा। वह सोशल मीडिया पर इतना एक्टिव है, वहां पर भी जाकर चेक कर लेते। यह बहुत निंदनीय, शर्मनाक और दर्दनाक भी है। उन्होंने मानसिक तौर पर जो नुकसान किया है, उसका हर्जाना उन्हें देना पड़ेगा। जवाबदेही तो बनती है। कम से कम एनबीए में जाकर जवाब दें कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। इस तरह से करके पतली गली से निकल जाना, बिल्कुल चलेगा नहीं। किसी ने सुना और उसे अनदेखा कर दिया, ऐसा नहीं होगा। उनको सजा मिलनी चाहिए। उनके खिलाफ एक्शन लेना चाहिए। अब वकील तय करेंगे। उनको नोटिस दिया जाएगा कि ऐसा क्यों किया। इसका जवाब दें। उन पर मानहानि का दावा किया जाएगा। अब वकील जो सलाह देंगे, वह करेंगे। लेकिन एक एक्शन लेना तो जरूरी है। अगर छोड़ दिया, तब कितने लोगों की जिंदगियां तबाह कर देंगे। हमने एक पुत्र खो दिया है, उसका दुख आज भी है। मैं इसकी भर्तसना करता हूं। आगे यह न हो, इस तरह की जर्नलिज्म समाज को खोखला कर देगी। यह बीमारी बढ़ती जा रही है, इस पर रोक लगाना जरूरी है। अगर आपने सुना ही था, तब मुझे एक फोन कर लेते। मैसेज डाल देते। मैं आपको बता देता। खंडन कर देता।

बेटे की जब आवाज सुनी, तब सांस में सांस आई
अध्ययन का फोन लगने के बाद ऐसा लगा कि मरते हुए को ऑक्सीजन मिल गया। हमने राहत की सांस ली। आज परिवार का कोई भी सदस्य ट्रेन, प्लेन पकड़कर बाहर जाता है, जब तक वह गंतव्य तक नहीं पहुंच जाता, तब तक दिल में धुकधुकी लगी रहती है। आज का माहौल सही नहीं रहा। उस उस दौरान मेरे नाते-रिश्तेदारों के फोन मैसेज आना शुरू हो गया। क्या होता है कि ऐसी खबरें एक कान से दूसरे कान पहुंचकर और विषाक्त हो जाती है। वह और ही रूप ले लेती हैं। आप समझ सकते हैं कि हम किस घबराहट के दौर से गुजरे। बेटे की जब आवाज सुनी, तब सांस में सांस आई। उसको भी कहीं और से खबर मिली थी। वह भी सुनकर घबरा गया। उसे लगा कि मेरे करियर को खराब करने के लिए कहीं कोई षड्यंत्र तो नहीं है। दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो रहा हैं, इसकी क्या वजह हो सकती है। कौन ऐसा कर रहा है। ऐसे कैसे छाप सकते हो। उस दौरान जिस दौर से गुजरे, ऐसा लगा कि एक-डेढ़ घंटे में हमारी सौ मौतें हो गई। आज के जमाने में फोन न लगे, तब समझ सकते हैं कि परेशानी और कितनी बढ़ जाती है। फिर तो अनाप-शनाप सोचने लगते हैं।

इस दौरान अमेरिका से बहनों और पटना से नाते-रिश्तेदारों के फोन आने शुरू हो गए। लोग कहने-लिखने लगे कि यह क्या हम सुन रहे हैं। हमने सबसे यही कहा कि धीरज रखो, हम सच्चाई पता करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा होना नहीं चाहिए, ऐसा नहीं हो सकता वगैरह-वगैरह करके लोगों को समझाया। सच्चाई पता लगने पर सभी बहुत नाराज थे। उनका कहना था कि इन लोगों को छोड़ना नहीं। इनको सबक सिखाओ। हम इतना घबरा गए थे। फिर आप कितना परेशान हुए होंगे, यह हम समझ सकते हैं कि आपके साथ क्या हुआ होगा। बैठे-बिठाए बहुत बड़ी परेशानी में डाल दिया।

मुझे मारो मत, मैं जिंदा हूं
अध्ययन का भी कहना था कि टीआरपी के लिए खबर को सनसनीखेज बनाना गलत है। ईश्वर की दया से मैं अपने पैरों पर खड़ा हो रहा हूं। मैंने अपनी जमीन पाई है, तब मेरी जमीन तो मत खींचो। मुझे मारो मत, मैं जिंदा हूं। इस तरह की शर्मनाक हरकत कैसे कर सकते हो। वे दुखी भी थे और गुस्सा भी थे। चलिए, ठीक है, ऐसी खबर से उबर कर हम बाहर आ गए हैं। भगवान न करे कि किसी के भाई-बहन और बेटे के साथ ऐसा न करे।

मां ने तो रोना-बिखलना शुरू कर दिया
अध्ययन की मां ने तो तुरंत सुनकर रोना-बिखलना शुरू कर दिया। समझिए मां का दिल कितना कमजोर होता है। जब उनका चीखना-चिल्लाना शुरू हो जाता है, तब आप उनको न तो संभाल सकते हैं और न ही कुछ बता सकते हैं। मैंने उनको बहुत समझाया, ढांढस बंधाया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। अभी उसका फोन आ जाएगा। जब फोन आया, तब जाकर उनकी भी जान में जान आई। यह बात सोचकर मैं अभी भी सिहर जा रहा हूं। ऐसा कैसे कर लिया। बेटे ने मां से बोला- मॉम! घबराने की बात नहीं है। मैं बिल्कुल ठीक हूं। इन लोगों को जाने दो। हम इन पर बाद में एक्शन लेंगे। अभी आप इत्मीनान रखिए। मैं वापस आ रहा हूं। अब जो हो गया, उस पर हमारा बस तो नहीं था। इनकी खैर-खबर लूंगा, इत्मिनान रखिए। काफी समझाने के बाद जाकर समझीं। लेकिन अभी भी दो-दो मिनट पर उस बात को उठाती हैं कि उनको किस तरह से सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने ऐसे कैसे मेरे बेटे के बारे में बोल दिया। एक मां का जो नॉर्मल रिएक्शन होता है, वही उनका भी था। ऐसी खबर सुनकर कोई भी मां दहल जाएगी। बहरहाल, अध्ययन दिल्ली से कल ही आ गए।

वकील से मिलकर विचार-विमर्श करूंगा
आज शाम को वकील से मिलूंगा। उनके साथ बैठकर विचार-विमर्श करूंगा कि क्या और कैसे करना है। एक्शन लेना तो जरूरी है। वे लोग बहुत क्षमा मांग रहे हैं। कह रहे थे कि आप ट्वीट डिलीट कर दीजिए। लीगल एक्शन मत लीजिए, हम कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। लेकिन हमने कहा- नहीं, हम यह नहीं सुनने वाले हैं। उनके मालिक जो हैं, वे छिपे बैठे हैं। वे ऐसे ही साधारण किसी भी प्रतिनिधि को भेज रहे हैं, जो इसी बात की दुहाई दे रहा है कि आप पहले जिस बिल्डिंग में रहते थे, हम उसी में रहते थे। हम तो परिवार के जैसे हैं। छोड़िए, भूल जाइए। ऐसी तमाम चीजें। किसी का नुकसान करके भूल जाइए, इतना आसान होता है क्या। किसी का गला काट दीजिए और भूल जाइए। गलती हो गई, माफ कर दीिजए। यह बहुत गलत बात है।

फिलहाल, हमारी तरफ से है कि हम ऐसे नहीं जाने देंगे। अगर छोटी-मोटी बात होती, तब भूल जाते। लेकिन जान के साथ खिलवाड़ किया है, तब जरूर एक्शन लेंगे। जैसा कहा कि इसका परिणाम कुछ भी हो सकता था। इसकी घोर निंदा करता हूं। अपील करता हूं कि ऐसी खबर छापने से पहले पुष्टि कर लें।



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By Raj

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