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एक घंटा पहले

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  • जया की बात मानकर फिल्म संरक्षण के लिये म्यूजियम बनाना चाह रहे अमिताभ

बीवी की बात पर अमल करने वाले पतियों में मेगास्टार अमिताभ बच्चन भी शामिल हैं। इस बार जया की बात पर अमल करने के अमिताभ के फैसले का फायदा शायद पूरे भारतीय सिनेमा को हुआ। भारतीय फिल्मों के संरक्षण के लिये एक म्यूजियम बने, अमिताभ ऐसा ख्वाब देख रहे हैं। संरक्षण के काम को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए उन्हें 19 मार्च की देर शाम को एक वर्च्युअल सेरेमनी में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म आर्काइव (FIAF) का अवॉर्ड दिया गया।

ये अवॉर्ड पाने वाले वो पहले भारतीय है। सेरेमनी में अमिताभ ने बताया कि जया बच्चन के कहने पर ही वे 2015 में पुरानी फिल्मों के संरक्षण से जुट गए थे।

फिल्में हमारा मूविंग हैरिटेज- अमिताभ
सेरेमनी में अमिताभ से जब ये पूछा गया कि पुरानी फिल्मों का संरक्षण क्यों होना चाहिए तो उन्होंने कहा- जब कोई ऐतिहासिक इमारत, चित्र या किसी कलाकृति के संरक्षण की बात होती है तो ऐसा सवाल किसी के मन में नहीं आता, तो फिर फिल्मों के बारे में भी ये नहीं होना चाहिए। आखिर फिल्में भी हमारा एक मूविंग हैरिटेज हैं। जो कुछ भी हमने रचा है उसका जतन करना भी हमारी जिम्मेदारी है ।

अमिताभ ने ये भी बताया कि एक एम्बेसडर के तौर पर वो फिल्मों के संरक्षण को बढ़ावा देते रहेंगे। वास्तव में वो चाहते हैं कि भारत में फिल्मों का पहला राष्ट्रीय म्यूजियम बने जिसमें सारी फिल्में और उससे जुड़ी चीजें संग्रहित और संरक्षित रखी जाएं।

यह अवॉर्ड अमिताभ को देने की वजह है कि उन्होंने लगभग 60 पुरानी फिल्में रीस्टोर कर रखी हैं और वह इस मुद्दे के लिए बहुत संजीदा हैं। वह पुरानी फिल्मों के रीस्टोरेशन के लिए अक्सर अपील भी करते रहते हैं।

अमिताभ ने बताई संरक्षण की वजह
लगभग दो साल पहले कोलकाता में हुए इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अमिताभ बच्चन ने कहा था कि हमारी पीढ़ी भारतीय सिनेमा के दिग्गजों को पहचानती तो है लेकिन ज्यादातर उनकी फिल्में या तो आग की भेंट चढ़ गई है या कूड़े के ढेर में छोड़ दी गई हैं। फिल्म विरासत को संभालने में बहुत सारी कमियां हैं, अगर हमने इस बारे में जल्द नहीं सोचा तो यह विरासत धूल हो जाएगी। अमिताभ का कहना है कि कम से कम आने वाली पीढ़ियों को पता होना चाहिए कि 100 साल के सिनेमा में किन लोगों ने सिनेमा में क्या योगदान दिया है।

अमेरिकन फिल्म प्रोड्यूसर डायरेक्टर मार्टिन स्कॉर्सेसी और फिल्म लेखक क्रिस्टोफर नोलन भी लाइव प्रोग्राम में मौजूद रहे थे। अमिताभ का नाम इस अवॉर्ड के लिए फिल्म हैरिटेज फाउंडेशन द्वारा नामांकित किया गया था। फिल्म हैरिटेज एक गैर सरकारी संस्था है जो फिल्मों के रजिस्ट्रेशन और फिल्म विरासत के अध्ययन पर काम करती है।

अमिताभ से पहले ये हो चुके सम्मानित
इस अवॉर्ड को पाने वाले अमिताभ बच्चन पहले भारतीय फिल्म कलाकार हैं। इससे पहले यह अवॉर्ड विश्व सिनेमा के जिन दिग्गजों को मिला है उनमें मार्टिन स्कॉर्सेस (2001), मनोएल डी ओलिवेरा (2002), इंगमार बर्गमैन (2003), गेराल्डिन चैपलिन (2004), माइक लेह (2005), हौसियो -सिएन (2006), पीटर बोगडानोविच 2007 ), जीन-पियरे और ल्यूक डार्डेन (2016), क्रिस्टोफर नोलन (2017), एपिचातपोंग वीरसेथाकुल (2018), जीन-ल्यूक गोडार्ड (2019), और वाल्टर सेलेस (2020) शामिल हैं।

20 साल हुए पूरे
एफआईएएफ सम्मान की शुरुआत वर्ष 2001 में की गई थी। एफआईएएफ के प्रेज़ीडेंट फ्रेडेरिक मायरे का कहना है कि सालाना पुरस्कार की 20वीं एनिवर्सरी पर अमिताभ बच्चन को सम्मानित करने से बेहतर कुछ और नहीं हो सकता था। गौरतलब है कि एफआईएफ भारत और एशिया में फिल्म संरक्षण के काम को लेकर बहुत सक्रिय रहा है।

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By Raj

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