• Hindi News
  • Business
  • LIC’s IPO Size May Not Be As Big As Expected, SEBI Changes Minimum Public Holding Rules

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

4 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
  • बड़ा इश्यू लाने के बजाय सरकार LIC के छोटे इश्यू से बाजार को टेस्ट कर सकती है
  • LIC का IPO 45,000-55,000 करोड़ का हो सकता है, फिर भी सबसे बड़ा इश्यू होगा

सरकार और सेबी LIC के IPO के लिए रास्ता साफ करने में जुटे हुए हैं। सरकार LIC एक्ट में संशोधन के लिए संसद की मंजूरी लेने की तैयारी कर रही है। सेबी ने IPO की रफ्तार बढ़ाने के लिए सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स रेगुलेशंस, 1957 में कुछ बदलाव किए हैं। बाजार के जानकारों के मुताबिक सेबी के एक्शन से लगता है कि इश्यू उम्मीद जितना बड़ा नहीं होगा।
बड़ी कंपनियों के लिए मिनिमम पब्लिक होल्डिंग लिमिट 10% से कम कर दी गई है
आइए देखते हैं कि सेबी ने क्या किया है? सेबी के बोर्ड ने बड़ी कंपनियों के लिए IPO के बाद मिनिमम पब्लिक होल्डिंग लिमिट को 10% से कम कर दिया है। उनके लिए मार्केट कैपिटलाइजेशन लिमिट को 10,000 करोड़ रुपये कर दिया है। ऐसी कंपनियों को IPO के दो साल के भीतर पब्लिक होल्डिंग 10% पर लाना होगा। और इसको लिस्टिंग के पाँच साल के भीतर 5-5% करके 25% तक लाना होगा।
LIC का IPO 45,000-55,000 करोड़ का हो सकता है, फिर भी सबसे बड़ा इश्यू होगा
अभी लिस्टिंग के लिए IPO में कम से कम 10% मिनिमम पब्लिक होल्डिंग बेचना जरूरी है। पब्लिक होल्डिंग को तीन साल के भीतर 25% तक लाना पड़ता है। ऐसे में इश्यू के बाद LIC का मार्केट कैप 8-10 लाख रुपये होता है तो पुराने नियम के हिसाब से इश्यू साइज 80,000-1,00,000 करोड़ होगा। लेकिन अब सिर्फ 45,000-55,000 करोड़ रुपये के इश्यू में काम हो जाएगा। इतनी रकम पर भी LIC का IPO देश का सबसे बड़ा इश्यू होगा।
बड़ी कंपनियों और हाई वैल्यू की हाईटेक कंपनियों को लिस्टिंग में आसानी होगी
प्राइम डेटाबेस के चेयरमैन पृथ्वी हल्दिया के मुताबिक, ‘मिनिमम पब्लिक होल्डिंग नॉर्म में बदलाव से LIC जैसी बड़ी कंपनियों और हाई वैल्यू की हाईटेक कंपनियों को लिस्टिंग में आसानी होगी।’ मार्केट एनालिस्टों के मुताबिक, वैल्यू के मामले में LIC का इश्यू सऊदी अरामको जैसा हो सकता है। मीडिया में आई खबरों में IPO के जरिए 10-15% शेयर बेचे जाने का अनुमान लगाया जा रहा था।
बड़ा इश्यू लाने के बजाय सरकार LIC के छोटे इश्यू से बाजार को टेस्ट कर सकती है
RBSA एडवाइजर्स के एमडी और सीईओ राजीव शाह के मुताबिक, ‘सरकार एक बार में LIC के ज्यादा शेयर बेचने के बजाय बाजार में बड़े इश्यू की खपत क्षमता का अंदाजा लगाने की कोशिश कर सकती है।’ प्राइमरी मार्केट में बने उत्साह और डीमैट एकाउंट की संख्या में उछाल से LIC के शेयरों की जोरदार मांग निकलने की संभावना का पता चलता है। कैपिटलविया ग्लोबल रिसर्च के रिसर्च हेड गौरव गर्ग के मुताबिक, ‘बाजार में बहुत पैसा है। 45,000-55,000 करोड़ रुपए का IPO आसानी से निकल सकता है।’
मिनिमम पब्लिक होल्डिंग नियमों में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
LIC देश का नगीना है और इसमें सरकार का 100% हिस्सा है। वह इश्यू की विशालता को देखते हुए इसकी वाजिब कीमत जानना चाहती है। शाह के मुताबिक, ‘सरकार निवेशकों के लिए पर्याप्त वैल्यू छोड़ना चाहती है। इश्यू छोटा रहने से आसानी होगी। लेकिन सरकार इसमें IRCTC की तरह इसमें अंडरवैल्यूएशन नहीं चाहेगी।’
IPO का साइज तय करने में सरकार के विनिवेश लक्ष्य का अहम रोल होगा
LIC के IPO का साइज तय करने में सरकार के विनिवेश लक्ष्य का अहम रोल होगा। बजट में इसके लिए 1.75 लाख करोड़ रुपए का टारगेट दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस टारगेट को बढ़ाकर 2.50 लाख करोड़ रुपए कर दिया है। एनालिस्टों के मुताबिक अगले फाइनेंशियल ईयर में LIC का IPO सरकार का मेन फोकस नहीं होगा। उसका पूरा ध्यान BPCL, एयर इंडिया, कॉनकॉर, शिपिंग कॉरपोरेशन, दो बैंकों और एक बीमा कंपनी में स्ट्रैटेजिक स्टेक सेल पर होगा।
विनिवेश योजना की ‘तारणहार’ के मैनेजमेंट को लेकर सरकार के रुख का इंतजार
LIC के IPO को लेकर निवेशकों में उत्साह तो होगा लेकिन सरकार को उसमें बहुत कुछ करना है। LIC विनिवेश योजना को कामयाब बनाने में सरकार की तारणहार बनती रही है। गर्ग कहते हैं, ‘ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि सरकार कंपनी के मैनेजमेंट को लेकर क्या कदम उठाती है। उसमें उसका कितना दखल रहता है।’

खबरें और भी हैं…



Source link

By Raj

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *