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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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  • फिच रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में कई टीके आने की संभावनाओं को देखते हुए भारत का भविष्य उज्ज्वल है
  • मूडीज ने अगले वित्त वर्ष के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान पहले के 10.6 पर्सेंट से बढ़ाकर 10.8 पर्सेंट कर दिया है

भारत की अर्थव्यवस्था को 2020 में जो नुकसान हुआ है, उससे वह 2021 में नाटकीय तरीके से उबर सकती है और दुनिया की सबसे तेज आर्थिक वृद्धि दर वाली अर्थव्यवस्था बन सकती है। अगले साल भारत की आर्थिक वृद्धि दर यूरोपीय देशों, विकसित देशों और इमर्जिंग मार्केट्स सहित दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रह सकती है। देश की आर्थिक वृद्धि दर में तेज उछाल आने की संभावना का सबसे बड़ा कारण बेस इफेक्ट को बताया जा रहा है, लेकिन इसकी दूसरी बड़ी वजहों में मोदी सरकार की तरफ से किए गए उपाय शामिल हैं।

ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन सहित 160 करोड़ डोज के प्री ऑर्डर दिए गए हैं

मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर नेगेटिव में 23.9 पर्सेंट रही थी लेकिन अगली यानी सितंबर तिमाही में यह अच्छे खासे सुधार के साथ नेगेटिव में 7.5 पर्सेंट पर आ गई। इसके चलते आने वाली तिमाहियों में भारत की आर्थिक वृद्धि दर में तेजी आने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। कई रेटिंग एजेंसियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के अपने अनुमान में एक के बाद एक कई बार बढ़ोतरी की है। फिच रेटिंग्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में लिखा है कि 2021 में कोविड-19 के कई टीकों के आने की संभावनाओं को देखते हुए भारत का भविष्य उज्ज्वल है। केंद्र सरकार ने ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के 50 करोड़ डोज सहित कुल 160 करोड़ डोज के प्री ऑर्डर दिए हैं।

टीका वितरण से सोशल डिस्टेंसिंग की पाबंदियां जल्द हटेंगी, सेंटीमेंट बेहतर होगा

रेटिंग एजेंसी ने टीका वितरण से सोशल डिस्टेंसिंग की पाबंदियों के उम्मीद से ज्यादा तेजी से हटने और सेंटीमेंट बेहतर होने की संभावना भी जताई है। एक समय दुनिया में सबसे ज्यादा आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने वाला भारत कोरोना वायरस का प्रकोप होने से काफी पहले मंदी की चपेट में आने से इकनॉमिक ग्रोथ के मामले में चीन के बाद दूसरे नंबर पर आ गया था।

वृद्धि दर लगभग 10 पर्सेंट हो सकती है, दुनिया की बड़ी इकनॉमी में सबसे ज्यादा

भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018 की अंतिम यानी मार्च तिमाही के 8.2 पर्सेंट से लगातार घटती हुई वित्त वर्ष 2021 की पहली यानी जून तिमाही में जीरो से 23.9 पर्सेंट नीचे आ गई। इन सबके बीच वित्त वर्ष 2019 की अंतिम तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 0.1 पर्सेंट रही थी। अनुकूल बेस इफेक्ट के साथ अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार की तरफ से किए गए उपायों से नए वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर लगभग 10 पर्सेंट हो सकती है जो दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा होगी।

उत्पादन, रोजगार सृजन को प्राथमिकता, लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर सरकार का फोकस

इस बीच मूडीज ने अगले वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान पहले के 10.6 पर्सेंट से बढ़ाकर 10.8 पर्सेंट कर दिया है। मूडीज का कहना है कि उसने राहत के हालिया उपायों के तहत सरकार की तरफ से उत्पादन और रोजगार सृजन को प्राथमिकता और लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर ध्यान दिए जाने पर अपने अनुमान में बढ़ोतरी की है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि सरकार के हालिया उपायों का मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, लोन की उपलब्धता और संकटग्रस्त सेक्टर को बढ़ावा देते हुए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के साथ ही रोजगार पैदा करना है।



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By Raj

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