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  • Resigned From Not Having Good Relationship With Finance Minister, Had Also Complained Of Lockdown

मुंबई14 घंटे पहले

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सुभाष चंद्र गर्ग ने पिछले महीने कहा था कि आत्मनिर्भर भारत पैकेज का लाभ ज्यादा से ज्यादा सूक्ष्म और छोटे उद्यमों तक पहुंचाने और बेरोजगार हुए मजदूरों की विशेष सहायता करने में किया जाना चाहिए। साथ ही बुनियादी ढांचा क्षेत्र में सरकारी निवेश बढ़ाए जाने की रणनीति पर भी काम करने की जरूरत है

  • पिछले साल बिजली मंत्रालय में ट्रांसफर होने के बाद गर्ग ने दिया था इस्तीफा, लिया था वीआरएस
  • गर्ग ने कहा था कि आत्मनिर्भर भारत के तहत जो योजनाएं पेश की गईं हैं, उनका लाभ 40-45 लाख को ही मिल पा रहा है

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि वित्तमंत्री के साथ उनके अच्छे संबंध नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्होंने इसीलिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी।

पिछले साल हुआ था ट्रांसफर

गर्ग को जुलाई 2019 में वित्त मंत्रालय से बिजली मंत्रालय में ट्रांसफर किया गया था, जिसके बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन किया था और उन्हें 31 अक्टूबर 2019 को कार्यमुक्त कर दिया गया। गर्ग ने एक ब्लॉग में लिखा कि सीतारमण ने वित्त मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने के एक महीने के भीतर ही जून 2019 में वित्त मंत्रालय से मेरे ट्रांसफर पर जोर देना शुरू कर दिया।

गर्ग का रिटायरमेंट आज था

उन्होंने लिखा है कि सामान्य स्थिति में उनका सेवाकाल आज (31 अक्टूबर 2020) समाप्त होता। उन्होंने आगे कहा कि नई वित्त मंत्री के साथ मेरे अच्छे और परिणामदायक संबंध नहीं थे और मैं वित्त मंत्रालय के बाहर कहीं काम करना नहीं चाहता था। सीतारमण 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद वित्त मंत्री बनीं। इससे पहले वित्त मंत्री रहे अरुण जेटली के साथ गर्ग के अच्छे संबंध थे। गर्ग ने अपने ब्लॉग में उनकी तारीफ भी की है। हालांकि, नई वित्त मंत्री के साथ उनका वैसा तालमेल कायम नहीं रह सका।

गर्ग ने ब्लॉग में लिखी बात

गर्ग ने ब्लॉग में लिखा कि यह बहुत पहले ही साफ हो गया कि उनके साथ काम करना काफी मुश्किल होने वाला था। वह मेरे प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त थीं। वह मेरे साथ काम करने में सहज नहीं थीं। गर्ग ने कहा कि आरबीआई के आर्थिक पूंजीगत ढांचे, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की समस्याओं के समाधान के लिए पैकेज, आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना और गैर बैंकों के पूंजीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनके साथ गंभीर मतभेद भी सामने आने लगे।

व्यक्तिगत संबंधों में खटास आ गई

गर्ग ने कहा कि जल्द ही हमारे व्यक्तिगत संबंधों में खटास आ गई, और साथ ही आधिकारिक कामकाजी संबंध भी काफी असहज हो गए। गर्ग ने कहा कि ऐसे हालात में उन्होंने काफी पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर सरकार के बाहर व्यापक आर्थिक सुधार के लिए काम करने का फैसला कर लिया था, हालांकि वह पांच जुलाई 2019 को पेश किए जाने वाले आम बजट की तैयारियों तक रुके रहे।

अर्थव्यवस्था को 20 लाख करोड़ का नुकसान

पिछले महीने ही सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा था कि 2020-21 में अर्थव्यवस्था को 20 लाख करोड़ रूपए का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि देशव्यापी लॉकडाउन की रणनीति सही नहीं होने के कारण नुकसान हुआ है। अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सुझाव देते हुए उन्होंने कहा लॉकडाउन के कारण कोरोना का प्रसार कम तो हुआ लेकिन इससे नुकसान कहीं ज्यादा हुआ।

आत्मनिर्भर भारत पैकेज का लाभ नहीं पहुंचा

उन्होंने कहा था कि आत्मनिर्भर भारत पैकेज का लाभ ज्यादा से ज्यादा सूक्ष्म और छोटे उद्यमों तक पहुंचाने और बेरोजगार हुए मजदूरों की विशेष सहायता करने में किया जाना चाहिए। साथ ही बुनियादी ढांचा क्षेत्र में सरकारी निवेश बढ़ाए जाने की रणनीति पर भी काम करने की जरूरत है। गर्ग ने कहा कि लॉकडाउन से सूक्ष्म लघु उद्योगों को बड़ा झटका लगा है। करीब 7.5 करोड़ एमएमएमई को मदद की जरूरत है । आत्मनिर्भर भारत के तहत जो योजनाएं पेश की गईं हैं, उनका लाभ 40-45 लाख को ही मिल पा रहा है। बड़ा वर्ग जो अभी भी अछूता है, सरकार को उन्हें सीधे अनुदान देना चाहिए।



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By Raj

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