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मुंबई23 दिन पहले

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  • इस वित्त वर्ष में 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य है। अभी तक के 9 महीनों में सरकार को केवल 12,778 करोड़ रुपए ही मिले हैं
  • सरकार ने पिछले 7 फाइनेंशियल ईयर में से दो बार लक्ष्य को बढ़ाया भी था और इसमें ज्यादा पैसा मिला था

इस साल कंपनियों में हिस्सेदारी बेच कर पैसे जुटाने के लक्ष्य को सरकार घटा सकती है। अभी तक के आंकड़े से तो यही लगता है। सरकार ने इस वित्त वर्ष में 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। जबकि अभी तक के 9 महीनों में सरकार को केवल 12,778 करोड़ रुपए ही मिले हैं।

7 सालों में कई बार लक्ष्य घटाया है

सूत्रों के मुताबिक सरकार अगले महीने में इस लक्ष्य को घटाने की घोषणा कर सकती है। इससे पहले भी सरकार ने पिछले 7 सालों में कई बार अपने लक्ष्यों को घटाई है और कई बार बढ़ाई भी है। सरकार ने 2015-16 में कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर 58 हजार 425 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा था। पर सरकार को इसकी तुलना में केवल 23 हजार 349 करोड़ रुपए मिले। सरकार ने लक्ष्य को घटाकर 25 हजार 312 करोड़ रुपए कर दिया था।

2016-17 में घटाया था लक्ष्य

इसी तरह 2016-17 में सरकार ने लक्ष्य को घटाकर 45 हजार 500 करोड़ रुपए कर दिया था। जबकि पहला लक्ष्य 69 हजार 500 करोड़ रुपए था और सरकार को केवल 24 हजार करोड़ रुपए ही मिल पाया था। 2017-18 हालांकि सरकार के लिए काफी अच्छा रहा। इसमें लक्ष्य को बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया। जबकि पहला लक्ष्य 72,500 करोड़ रुपए का था और सरकार को 1 लाख 642 करोड़ रुपए कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने से मिले थे।

7 सालों में दो बार लक्ष्य बढ़ा भी है

सरकार ने पिछले 7 फाइनेंशियल ईयर में से दो बार लक्ष्य को बढ़ाया था और इसमें ज्यादा पैसा मिला था। 2018-19 में सरकार ने पहले के 80 हजार करोड़ के लक्ष्य को बढ़ाकर 85 हजार करोड़ किया था। इस साल में सरकार को 85 हजार 63 करोड़ रुपए मिले थे। 2019-20 में सरकार ने 90 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा पर उसे केवल 49,828 करोड़ रुपए मिला। सरकार ने लक्ष्य घटाकर 65 हजार करोड़ रुपए कर दिया था।

सबसे बड़ा लक्ष्य इस साल में

अभी तक का सरकार का विनिवेश का लक्ष्य सबसे बड़ा इसी वित्त वर्ष में है। यह 2.10 लाख करोड़ रुपए है। 9 महीने बीत गए हैं। केवल 6 पर्सेंट ही पैसा अब तक सरकार जुटा पाई है। बता दें कि सरकार ने इस साल इतनी भारी-भरकम रकम जुटाने का लक्ष्य इसलिए रखा क्योंकि उसे यह उम्मीद थी कि देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का IPO आ जाएगा। हालांकि यह IPO अगले वित्त वर्ष में आना मुश्किल है। अगर यह IPO आ जाता है तो सरकार को इसी से 90 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम मिल जाती थी।

आईडीबीआई में भी हिस्सेदारी बेचने की योजना

इसी तरह से सरकार IDBI बैंक में भी हिस्सा बेचना चाहती है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) में भी सरकार हिस्सा बेच रही है। पर सरकार के लिए IDBI और LIC में हिस्सेदारी बेचना मुश्किल है। ऐसे में सरकार इस लक्ष्य को घटा सकती है। सरकार के पास अब केवल तीन महीने हैं। ऐसे में सरकार कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की अपनी रफ्तार तेज करेगी। सरकार के विनिवेश विभाग (दीपम) इस मामले में आगे की योजना बना रहा है।

उम्मीद है कि 1.20 लाख करोड़ रुपए मार्च अंत तक मिल सकते हैं। मोदी सरकार का यह 6ठवां साल है जब विनिवेश की रकम लक्ष्य से कम रही है।



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By Raj

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