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नई दिल्लीएक घंटा पहले

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वित्त मंत्रालय की रिव्यू रिपोर्ट में कहा गया कि इस कारोबारी साल की दूसरी तिमाही में ही V-शेप रिकवरी दिखने का मतलब यह  है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और तेजी से सुधर सकती है

  • लॉकडाउन की पाबंदियां हटने और आत्मनिर्भर भारत पैकेज से अर्थव्यवस्था रिकवरी के रास्ते पर आई
  • रिकवरी को सबसे ज्यादा सपोर्ट कृषि से और उसके बाद कंस्ट्रक्शन व मैन्यूफैक्चरिंग से मिल रहा है

भारतीय अर्थव्यवस्था में V-शेप की रिकवरी दिख रही है, क्योंकि इस कारोबारी साल की जुलाई-सितंबर तिमाही में GDP की विकास दर जून तिमाही के मुकाबले 23 फीसदी रही। यह बात वित्त मंत्रालय की ओर से नवंबर के लिए जारी मंथली इकॉनोमिक रिव्यू में कही गई। जून तिमाही में देश की GDP साल दर साल आधार पर 23.9 फीसदी गिर गई थी, लेकिन सितंबर तिमाही में गिरावट का स्तर घटकर महज 7.5 फीसदी रह गया।

रिव्यू में कहा गया कि इस कारोबारी साल की दूसरी तिमाही में ही V-शेप रिकवरी दिखने का मतलब यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और तेजी से सुधर सकती है। लॉकडाउन की पाबंदियों को धीरे-धीरे हटाने और आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत दिए गए राहत पैकेज से अर्थव्यवस्था में रिकवरी के रास्ते पर आ गई है। रिकवरी को सबसे ज्यादा सपोर्ट कृषि से और उसके बाद कंस्ट्रक्शन व मैन्यूफैक्चरिंग से मिल रहा है।

अक्टूबर और नवंबर में दुनियाभर में अनिश्चितता बढ़ी

हाल में फेस्टिव सीजन के कारण कोरोनावायरस संक्रमण के नए मामलों में बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन अब नंबर घट रहे हैं। अन्य देशों का भी यही रुझान है। अक्टूबर और नवंबर में दुनियाभर में अनिश्चितता बढ़ी, क्योंकि इस दौरान ग्लोबल कंपोजिट PMI और वस्तु व्यापार में थोड़ी बढ़ोतरी दिखी, लेकिन एनर्जी और मेटल की कीमतों में गिरावट दिखी।

विकसित देशों में महंगाई घटी, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बढ़ी

रिव्यू रिपोर्ट के मुताबिक विकसित देशों में महंगाई घटी है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बढ़ी है। इसका मतलब यह है कि कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में सप्लाई-साइड डिसरप्शन का प्रभाव अधिक पड़ा है। शेयर बाजार के रुझान बताते हैं कि निवेशकों में आशा का स्तर काफी ऊंचा बना हुआ है। नवंबर में डॉलर के कमजोर होने से दुनिया के बाकी हिस्सा में विकास की संभावना मजबूत हुई है।

दिसंबर तिमाही में देश में आर्थिक अनिश्चितता नहीं रहने का अनुमान

तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के बारे में सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर में भले ही कुछ संकेतकों में गिरावट देखी गई है, लेकिन दुनियाभर देखने वाली आर्थिक अनिश्चितता भारत में दिखने की उम्मीद नहीं है। रबी फसलों का रकबा बढ़ा है और जलाशयों में पानी भरा हुआ है। यह इस कारोबारी साल में कृषि सेक्टर का उत्पादन बढ़ने के बारे में शुभ संकेत है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय बढ़ी

रबी फसलों की बोआई बढ़ने और महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लाईमेंट गारंटी स्कीम (मनरेगा) के कारण गांवों में मजदूरी बढ़ी है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार योजना में 10,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त आवंटन से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय में और बढ़ोतरी होगी। इस कारोबारी साल में खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ने और धान की खरीदी में प्रगति के कारण भी ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ रही है।

कोरोनावायरस की दूसरी लहर एक चुनौती है

जोखिमों के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोनावायरस महामारी की दूसरी लहर एक चुनौती है। लेकिन वैक्सीन की प्रगति और कांटैक्ट सेंसिटिव सेक्टर में काम-काज का वर्चुअल तरीका अपनाए जाने से जून तिमाही जैसी गिरावट फिर से दिखने की संभावना नहीं है।



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By Raj

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