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नई दिल्ली13 मिनट पहले

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इन बदलावों के जरिए RBI कर्ज के तौर पर ली गई राशि की हेराफेरी पर रोक लगाना चाहता है

  • एक समीक्षा बैठक में RBI ने बैंकों को विशिष्ट खातों को खोलने की अनुमति देने का फैसला किया है
  • आरबीआई ने बैंकों से करंट अकाउंट के माध्यम से की जाने वाली लेनदेन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 14 दिसंबर को नए करंट बैंक अकाउंट खोलने के नियमों में कुछ छूट दी है, ये नए नियम आज यानी 15 दिसंबर से लागू हो गए हैं। इन छूट के तहत, सभी कमर्शियल बैंकों और पेमेंट बैंकों को RBI के 6 अगस्त के सर्कुलर से बाहर रखा जाएगा, जिसमें नियामक ने बैंकों द्वारा चालू खाते खोलने के लिए कुछ नियमों के बारे में बताया गया था। “एक समीक्षा बैठक में RBI ने बैंकों को विशिष्ट खातों (स्पेसिफिक अकाउंट) को खोलने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है।

RBI ने अपने नए सर्कुलर में रियल स्टेट के लिए खोले गए करंट अकाउंट्स को भी शामिल किया। ये बदलाव रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेन्ट) अधिनियम, 2016 की धारा 4 (2) एल (डी) के तहत होम बॉयर्स से अनिवार्य रूप से इकट्ठे किए गए अग्रिम भुगतानों का 70% बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है। इसके अलावा, RBI ने उन भुगतान एग्रीगेटर / प्रीपेड भुगतान इंस्ट्रूमेंट जारी करने वालों के नोडल या एस्क्रो खातों को भी छूट दी है, जिन्हें भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग (DPSS) द्वारा अनुमति प्राप्त है। केंद्रीय बैंक ने डेबिट कार्ड, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता और FEMA, 1999 के तहत अनुमति वाले खातों के लिए भी छूट दी गई है।

जो बैंक अकाउंट आईपीओ, एनएफओ, एफपीओ, शेयर बायबैक, लाभांश भुगतान, कमर्शियल पेपर जारी करना, डिबेंचर का आवंटन, ग्रेच्युटी, आदि के उद्देश्य से खोले गए थे, उन खातों को भी छूट दी गई है। इसके अलावा मुद्रा की सोर्सिंग के लिए व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटर्स और उनके एजेंटों के खातों को भी छूट दी गई है।

हालांकि, नियामक ने बैंकों को आगाह किया कि अनुमति इस शर्त पर दी गई है कि बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि इन खातों का उपयोग केवल स्पेसिफाई (निर्दिष्ट) लेनदेन के लिए किया जाए और इन खातों को निगरानी के लिए सीबीएस की दायरे में रखा जाए।

क्या हैं नए नियम?

आरबीआई ने बैंकों से करंट अकाउंट के माध्यम से की जाने वाली लेनदेन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब किसी भी बैंक में कैश क्रेडिट ओवरड्राफ्ट लोन के साथ ग्राहक का करंट अकाउंट नहीं रहेगा। ग्राहक को कैश क्रेडिट में ओवरड्राफ्ट लोन अकाउंट से ही लेनदेन करना होगा। करंट अकाउंट का ऑप्शन 15 दिसंबर से बंद कर दिया जाएगा। करंट अकाउंट उसी संस्था या संगठन का होगा, जिसने कैश क्रेडिट या ओवरड्राफ्ट की सुविधा नहीं ले रखी है। यानी जिन ग्राहक या संगठन ने किसी भी बैंक से ओवरड्राफ्ट या डिमांड लोन नहीं ले रखा है वह करंट अकाउंट ओपन कर सकते हैं।

नए नियम से जुड़ी खास बातें

  • उपभोक्‍ता ने बैंकों से 5 करोड़ रुपए से कम लोन लिया है। ऐसी कंपनियों का कोई भी बैंक करंट अकाउंट खोल सकता है।
  • बैंकिंग सिस्‍टम से 5 से 50 करोड़ रुपए तक का लोन लेने वाले उपभोक्‍ताओं का करंट अकाउंट सिर्फ कर्जदाता बैंक में ही खुल सकता है। नॉन-लेंडिंग बैंक ऐसी कंपनियों का सिर्फ कलेक्‍शन अकाउंट खोल सकते हैं यानी इनमें सिर्फ पैसा आ सकता है। इस पैसे का कर्ज देने वाले बैंक के कैश क्रेडिट अकाउंट में भुगतान करना होगा। कलेक्‍शन अकाउंट पर बैंक को कोई फायदा नहीं मिलता है।
  • बैंकिंग सिस्‍टम से 50 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का कर्ज लेनी वाली कंपनी का एक कर्जदाता बैंक में एक एस्‍क्रो अकाउंट खोलना होगा और यही बैंक करंट अकाउंट भी खोल सकता है। ऐसी कंपनी का दूसरे बैंक कलेक्‍शन अकाउंट खोल सकते हैं।

क्यों किया नियमों में बदलाव?
इन बदलावों के जरिए RBI कर्ज के तौर पर ली गई राशि की हेराफेरी पर रोक लगाना चाहता है। अभी तक ज्‍यादातर कर्ज लेने वाली कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लोन लेते हैं, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के लिए करंट अकाउंट विदेशी या निजी बैंक में खुलवाते हैं। दरअसल, ये बैंक अपने ग्राहकों को बेहतर नगदी प्रबंधन की पेशकश करते हैं। ज्‍यादातर विदेशी और निजी मझोली कंपनियों को बड़ा कर्ज नहीं देते हैं, लेकिन सभी बैंक चाहते हैं कि कंपनियां अपने करंट अकाउंट उनके पास ही खुलवाएं।



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By Raj

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