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मुंबई8 घंटे पहले

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कुछ जीवन बीमा पॉलिसी में अधिक उम्र, लाइफस्टाइल या बीमारी के कारण प्रीमियम अधिक चुकाना पड़ता है। इस पर टैक्स भी लगता है। आईसीएआई ने कहा है कि अधिक प्रीमियम की वजह से पॉलिसी होल्डर्स को इंश्योरेंस कवर पर टैक्स कवर नहीं मिलता है

  • आईसीएआई ने कहा है कि अधिक प्रीमियम की वजह से पॉलिसी होल्डर्स को इंश्योरेंस कवर पर टैक्स कवर नहीं मिलता है
  • इंस्टीट्यूट ने सुझाव दिया है कि जीवन बीमा पर टैक्स राहत अब पॉलिसी टर्म के आधार पर दिया जाना चाहिए

अब बजट के लिए सुझाव देने का दौर शुरू हो गया है। अगले साल के लिए अभी से बजट के लिए सुझाव मंगाए गए हैं जिस पर वित्तमंत्री फैसला लेंगी। इसी कड़ी में 10 साल से ज्यादा अवधि की जो जीवन बीमा पॉलिसी हैं, उन्हें टैक्स में राहत दिए जाने की मांग की गई है।

आईसीएआई ने दिया बजट के लिए प्रस्ताव

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने प्री-बजट प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव के तहत आईसीएआई ने सरकार को सुझाव दिया है कि जीवन बीमा की जिन पॉलिसीज की अवधि 10 साल या उससे अधिक हैं, उस पर बीमाधारकों को टैक्स में राहत मिलनी चाहिए। इंस्टीट्यूट ने सुझाव दिया है कि जीवन बीमा पर टैक्स राहत अब पॉलिसी टर्म के आधार पर दिया जाना चाहिए, ना कि प्रीमियम और सम एश्योर्ड के अनुपात आधार पर।

अभी 10 (10डी) के तहत मिलती है राहत

अभी तक सेक्शन 10 (10डी) के तहत भरे गए प्रीमियम और सम अश्योर्ड के आधार पर टैक्स राहत मिलती है। कुछ जीवन बीमा पॉलिसी में अधिक उम्र, लाइफस्टाइल या बीमारी के कारण प्रीमियम अधिक चुकाना पड़ता है। इस पर टैक्स भी लगता है। आईसीएआई ने कहा है कि अधिक प्रीमियम की वजह से पॉलिसी होल्डर्स को इंश्योरेंस कवर पर टैक्स कवर नहीं मिलता है।

टर्म पॉलिसी पर टैक्स की राहत मिलने से होगा फायदा
आईसीएआई ने सुझाव दिया है कि 10 साल या उससे अधिक टर्म वाली पॉलिसी पर टैक्स राहत की सुविधा मिलने से इसमें लंबे समय तक निवेश बना रहेगा। आईसीएआई का कहना है कि किसी पॉलिसी के सरेंडर या निकासी के समय नेट इनकम या हानि की गिनती करने के लिए जो प्रीमियम काटा जाता है, उसमें महंगाई का ध्यान नहीं रखा जाता है।

कैपिटल असेट के तौर पर माना जाए

आईसीएआई ने सुझाव दिया है कि जीवन बीमा पॉलिसी को ऐसे कैपिटल असेट के तौर पर मानना चाहिए जो इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 2(4) के तहत माना गया है। इंस्टीट्यूट ने कहा है कि बीमा कंपनियों को बिजनेस के घाटे को लंबे समय तक के लिए कैरी फॉरवर्ड और सेट ऑफ की मंजूरी दी जानी चाहिए। अभी बीमा कंपनियां 8 साल तक ही बिजनेस घाटे को कैरी फॉरवर्ड और सेट ऑफ कर सकती हैं। आईसीएआई का कहना है कि इतने कम समय से यह बात नहीं बन पाती है।



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By Raj

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