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नई दिल्लीएक महीने पहले

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इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के प्रेसिडेंट जस्टिस पीपी भट और वाइस प्रेसिडेंट प्रमोद कुमार की पीठ ने तीन अलग-अलग आदेश जारी कर रतन टाटा ट्रस्ट, JRD टाटा ट्रस्ट और दोराबजी टाटा ट्रस्ट के टैक्स-एक्जेंप्ट स्टेटस को कायम रखा - Dainik Bhaskar

इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के प्रेसिडेंट जस्टिस पीपी भट और वाइस प्रेसिडेंट प्रमोद कुमार की पीठ ने तीन अलग-अलग आदेश जारी कर रतन टाटा ट्रस्ट, JRD टाटा ट्रस्ट और दोराबजी टाटा ट्रस्ट के टैक्स-एक्जेंप्ट स्टेटस को कायम रखा

  • ट्रिब्यूनल ने कहा कि तीनों ट्रस्ट के खिलाफ आयकर विभाग के मार्च 2019 के रिवीजन ऑर्डर का कोई कानूनी आधार नहीं है
  • टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में इन तीनों ट्रस्ट्स की कुल करीब 66% हिस्सेदारी है

इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने टाटा ग्रुप के तीन ट्रस्ट्स का टैक्स-एक्जेंप्ट दर्जा बरकरार रखने का फैसला दिया। ट्रिब्यूनल ने आयकर विभाग के उस रिवीजन ऑर्डर को रद कर दिया, जिसमें इस आधार पर टैक्स एक्जेंप्शन कैंसल करने की बात कही गई थी कि इन ट्रस्ट्स के पास टाटा संस के शेयर हैं। ट्रिब्यूनल ने टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री को भी फटकार लगाई क्योंकि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन पद से बर्खास्त किए जाने के तुरंत बाद टैक्स विभाग को कंपनी के खिलाफ दस्तावेजों की आपूर्ति की थी।

ITAT के प्रेसिडेंट जस्टिस पीपी भट और वाइस प्रेसिडेंट प्रमोद कुमार की पीठ ने सोमवार को तीन अलग-अलग आदेश जारी कर रतन टाटा ट्रस्ट, JRD टाटा ट्रस्ट और दोराबजी टाटा ट्रस्ट के टैक्स-एक्जेंप्ट स्टेटस को कायम रखा। उसने कहा कि तीनों ट्रस्ट के खिलाफ इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मार्च 2019 के रिवीजन ऑर्डर का कोई कानूनी आधार नहीं है। टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में इन तीनों ट्रस्ट्स की कुल करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

आयकर आयुक्त (एक्जेंप्ट) ने टाटा संस पर इन ट्रस्ट्स के दशकों पुराने ओनरशिप को खत्म करने की चेतावनी दी थी

आयकर आयुक्त (एक्जेंप्ट) (CIT-E) ने टाटा संस पर इन ट्रस्ट्स के दशकों पुराने ओनरशिप को खत्म करने की चेतावनी दी थी और आरोप लगाया था कि इस तरह की शेयरहोल्डिंग इनकम टैक्स कानून के खिलाफ है। CIT-E के दावे के को गलत बताते हुए टाटा ग्रुप के ट्रस्ट्स ने ट्रिब्यूनल में अपील की थी। मिस्त्री को फटकार लगाते हुए ITAT ने कहा कि टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के तुरंत बाद कंपनी की अनुमति के बिना आयकर विभाग को दस्तावेज सौंपने के उनके व्यवहार को आत्मा की आवाज और नैतिक नहीं माना जा सकता। ऐसा व्यवहार सभ्य कॉरपोरेट दुनिया में पहले कभी नहीं देखा गया है। टाटा संस ने अक्टूबर 2016 को सायरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से बर्खास्त कर दिया था।

ITAT ने कहा कि ट्रस्ट्स के किसी भी ट्रस्टी का टाटा संस के साथ बड़ा हित नहीं जुड़ा हुआ है

ITAT ने कहा कि ट्रस्ट्स के किसी भी ट्रस्टी का टाटा संस के साथ बड़ा हित नहीं जुड़ा हुआ है। ट्रस्ट्स ने टाटा संस में जो निवेश किया है, उसका मकसद शेयरों में निवेश नहीं है, बल्कि निविर्वाद रूप से टाटा ग्रुप की सफलता के फल को साझा करने और आम आदमी के लाभ के लिए यह निवेश किया गया है। ट्रस्ट का निवेश कॉर्पस के रूप में है, इसके कारण उन्हें I-T एक्जेंप्शन के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।

ट्रस्टीज को किए गए भुगतान को उन्हें दिए गए लाभ के तौर पर दिखाना गलत है

ट्रिब्यूनल ने कहा कि टाटा संस ने ट्रस्ट्स के ट्रस्टीज को जो भुगतान किया गया है, वह पूर्व डायरेक्टर्स या कर्मचारियों के रूप में उनकी भूमिका के लिए भुगतान किया गया है और उन्हें दिए गए लाभ के साथ उनका कोई संबंध नहीं है। उदाहरण के लिए रतन एन टाटा और एनए सूनावाला को जो पेंशन दिया गया है, उसका संबंध पूरी तरह से टाटा संस के कारोबार से है। इसलिए इन्हें ट्रस्टीज को लाभ के रूप में बताना गलत है।

बर्खास्तगी के तुरंत बाद मिस्त्री द्वारा टाटा संस के खिलाफ दस्तावेज आयकर विभाग को सौंपना संदिग्ध

मिस्त्री के बारे में ट्रिब्यूनल ने कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का रिवीजन ऑर्डर उनकी बर्खास्तगी के 8 सप्ताह बाद उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों पर आधारित है। ऐसी स्थिति में उनके आरोप पर संदेह पैदा होता है। वह 2013 से टाटा संस के चेयरमैन थे और 2006 से निदेशक थे। ऐसे में माना जा सकता है कि उन्हें सबकुछ पहले से पता था, लेकिन लंबे समय तक उन्होंने कुछ नहीं कहा। जैसे ही उन्हें चेयरमैन पद से बर्खास्त किया गया, उन्होंने सभी दस्तावेजों की कॉपी जुटाई और उन्हें इनकम टैक्स विभाग को सौंप दिया। ऐसा व्यवहार सभी कॉरपोरेट दुनिया में पहले नहीं देखा गया है।

ITAT के आदेश के बाद रजिस्ट्रेशन कैंसिलेशन किए जाने के विरुद्ध ट्रस्ट्स का पक्ष मजबूत हुआ है

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस आधार पर कार्रवाई की थी कि टैक्स एक्जेंप्ट स्टेटस का दावा करने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं कर सकते और उससे लाभ नहीं कमा सकते हैं। टैक्स एक्जेंप्ट स्टेटस खत्म होने और स्वामित्व संरचना पर सवाल पैदा होने से टाटा संस का कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो सकता था। ITAT के आदेश के बाद टैक्स विभाग द्वारा उनका रजिस्ट्रेशन कैंसिलेशन किए जाने के विरुद्ध उनका पक्ष मजबूत करता है। रजिस्ट्रेशन कैंसिलेशन के मामले की सुनवाई ITAT की एक अलग पीठ कर रही है।

इनकम टैक्स विभाग ने अक्टूबर 2019 में टाटा समूह के 6 ट्रस्ट्स का रजिस्ट्रेशन रद कर दिया था

इनकम टैक्स विभाग ने अक्टूबर 2019 में टाटा समूह के 6 ट्रस्ट्स का रजिस्ट्रेशन रद कर दिया था। ये ट्रस्ट्स थे जमशेदजी टाटा ट्रस्ट, RD टाटा ट्रस्ट, टाटा एजुकेशन ट्रस्ट, टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट, सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट और नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट। इससे पहले नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) और संसद की लोक लेखा समिति ने कहा था कि इन ट्रस्ट्स के टैक्स एक्जेंप्ट स्टेटस को बनाए रखने की अनुमति देने से विभाग को रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है। 6 ट्रस्ट्स ने स्वीकार किया था कि उनकी कुछ संपत्तियां टैक्स कानून के मुताबिक नहीं हैं और उन्होंने मार्च 2015 में अपने रजिस्ट्रेशन सरेंडर कर की पहल की थी।



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By Raj

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