• Hindi News
  • Business
  • Shapoorji Pallon’s Stake In Tata Sons Does Not Exceed Rs 80,000 Crore: Salve

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

नई दिल्ली15 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
  • मिस्त्री ग्रुप ने टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी की वैल्यू 1.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने का दावा किया था
  • टाटा संस ने SP ग्रुप को कर्ज चुकाने के लिए होल्डिंग कंपनी में उसका स्टेक खरीदने का ऑफर दिया था

टाटा संस में शपूरजी पलोन जी ग्रुप के 18.4 पर्सेंट स्टेक की वैल्यू 80,000 करोड़ रुपये रुपये से ज्यादा नहीं है। यह बात सायरस मिस्त्री और टाटा संस के मुकदमे में टाटा का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट में कही। मिस्त्री ग्रुप ने पहले टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी की वैल्यू 1.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने का दावा किया था।

एसपी ग्रुप को भारी पड़ सकता है वैल्यूएशन में बड़ा फर्क

वैल्यूएशन में इतना बड़ा फर्क सचमुच होना नकदी की कमी से जूझ रहे एसपी ग्रुप को बहुत भारी पड़ सकता है। मिस्त्री को 2016 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन की पोस्ट से हटाए जाने के बाद एसपी और टाटा ग्रुप में मुकदमेबाजी चल रही है। बताया जाता है कि टाटा संस ने SP ग्रुप को कर्ज चुकाने के वास्ते होल्डिंग कंपनी में उसका स्टेक खरीदने का ऑफर दिया था।

SP ग्रुप ने 29 अक्तूबर को सेपरेशन प्लान जमा कराया था

SP ग्रुप ने टाटा ग्रुप से सात दशक का रिश्ता तोड़ने के लिए 29 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में सेपरेशन प्लान जमा कराया था। सेपरेशन प्लान में SP ग्रुप ने नॉन कैश सेटलमेंट के लिए टाटा ग्रुप की उन सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयर मांगे थे, जिनमें टाटा संस का स्टेक है। इसके लिए लिस्टेड एसेट्स (शेयर प्राइस वैल्यू के आधार पर) और ब्रांड (टाटा की तरफ से किए गए वैल्यूएशन के पब्लिकेशन के मुताबिक) के समानुपात में बंटवारे को आधार बनाने की मांग की गई थी। सायरस ने खुद को टाटा संस के चेयरपर्सन पद पर दोबारा बैठाए जाने की भी मांग की थी।

मिस्त्री निजी तौर पर बर्खास्तगी की शिकायत कर सकते हैं

बार एंड बेंच ने सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे की दलील हवाले से कहा है, “मिस्त्री को माइनॉरिटी शेयरहोल्डर के हक से एग्जिक्यूटिव चेयरमैन चेयरमैन नहीं बनाया गया था। वैसे भी मिस्त्री निजी तौर पर (अपनी बर्खास्तगी की) शिकायत कर सकते हैं, माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स नहीं।

मिस्त्री सिर्फ मार्च 2017 तक एग्जिक्यूटिव चेयरमैन अप्वाइंट थे

साल्वे ने कहा कि मिस्त्री का बतौर एग्जिक्यूटिव चेयरमैन अप्वाइंटमेंट सिर्फ मार्च 2017 तक था, जीवन भर के लिए नहीं। इस दलील के साथ उन्होंने 1965 से 1980 बीच टाटा संस के बोर्ड में किसी सदस्य के नहीं होने का जिक्र किया। सायरस के पिता पलोनजी मिस्त्री को 1980 में टाटा संस के बोर्ड में नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया था जबकि सायरस ने 2006 में टाटा संस को ज्वाइन किया था।

साल्वे की दलील: मिस्त्री को डेजिग्नेशन दी गई थी, पोस्ट नहीं

साल्वे ने कहा कि मिस्त्री को डेजिग्नेशन दी गई थी पोस्ट नहीं। उन्होंने कहा, “कई बार कंपनियों में एग्जिक्यूटिव चेयरमैन नहीं होते और सबसे सीनियर डायरेक्टर ही बोर्ड की अध्यक्षता करते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि नॉर्मल कॉरपोरेट डेमोक्रेसी में 18 पर्सेंट के साथ मिस्त्री बोर्ड में एक भी डायरेक्टर की जगह नहीं हासिल कर सकते थे और बोर्ड 68 पर्सेंट स्टेकहोल्डर्स के नॉमिनी से भरा होता।”

NCLAT ने 18 दिसंबर 2019 को दिया था मिस्त्री की बहाली का आदेश

कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने 18 दिसंबर 2019 को अपने आदेश में सायरस मिस्त्री को टाटा संस का चेयरमैन दोबारा बनाने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ टाटा संस सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश पर 10 जनवरी 2020 को रोक लगा दी थी।



Source link

By Raj

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *