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एक महीने पहले

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  • FCI पर अभी कुल 3.81 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, जो राशन की दुकानों को कम दाम पर अनाज देने पर सरकार से पूरी भरपाई नहीं होने से बढ़ा है
  • जून 2020 में खत्म फसली मौसम में 9.727 करोड़ टन गेहू और चावल का भंडार था जो 4.112 करोड़ टन की जरूरत के दोगुने से ज्यादा था

अनाज की खरीदारी करने वाली सरकारी एजेंसी फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) हर सीजन में किसानों से तय भाव पर चावल और गेहूं खरीदती है। किसानों का कहना है कि नए कृषि कानूनों के चलते थोक मंडियां बंद हो जाएंगी और अंत में अनाज की सरकारी खरीदारी वाली व्यवस्था भी खत्म हो जाएगी।

पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसानों को फायदा

FCI के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सरकारी योजनाओं के लिए अनाज खरीदते रहने से उस पर कर्ज का भारी बोझ हो गया है। हालांकि इससे खासतौर पर पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसानों को टनों गेहूं और चावल का उत्पादन करने को बढ़ावा मिलता रहा है।

FCI के पास 9.727 करोड़ टन गेहूं और चावल का भंडार

कई राज्यों में अनाज के बंपर उत्पादन और FCI की तरफ से बढ़ती खरीदारी के चलते उसके गोदामों में अनाज रखने की जगह कम पड़ रही है। जून 2020 में खत्म फसली मौसम में FCI के पास 9.727 करोड़ टन गेहूं और चावल का भंडार था जो 4.112 करोड़ टन की जरूरत के दोगुने से ज्यादा था।

सरकारी गोदामों में लगभग 39 अरब डॉलर का अनाज

आधिकारिक अनुमान के मुताबिक सरकारी गोदामों में लगभग 39 अरब डॉलर का अनाज पड़ा है। FCI अपने गोदामों में पड़ा गेहूँ और चावल विदेशी बाजार में नहीं बेच सकती क्योंकि इसका अनाज उनसे महंगा है। इसके अलावा वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन के नियमों में जन कल्याण के लिए खरीदे गए अनाज के निर्यात पर पाबंदी है।

चार अहम राज्यों में बढ़ी है FCI की खरीदारी

साठ के दशक में हुई हरित क्रांति का अगुआ पंजाब और हरियाणा थे और परंपरागत रूप से यहां FCI की खरीदारी सबसे ज्यादा रही है। लेकिन पिछले दो दशकों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे दूसरे राज्यों के किसानों ने भी गेहूं और चावल का उत्पादन बढ़ा लिया है। इसके चलते FCI की भी खरीदारी बढ़ी है। 2020 में मध्य प्रदेश ने 1.294 करोड़ टन गेहूं FCI को बेचा था जो 2000-01 में सिर्फ 3,51,000 टन था। FCI ने इस साल छत्तीसगढ़ से कुल 52 लाख टन अनाज खरीदा है जो दो दशक पहले 857,000 टन हुआ करता था।

सरकार के भरपाई नहीं करने से कर्ज लेना पड़ रहा है

पिछले दशक में FCI का खर्च बढ़ा है, क्योंकि चावल के एमएसपी में 73 पर्सेंट और गेहूं के दाम में 64 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन वह जिन कीमतों पर सरकारी राशन की दुकानों पर बेचने के लिए देता है उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। FCI सरकारी राशन की दुकानों के जरिए 80 करोड़ लाभार्थियों को 5 किलो चावल 3 रुपये और गेहूं 2 रुपये की दर से मुहैया कराती है।

सरकार से भुगतान नहीं मिलने से हर साल कर्ज लेना पड़ रहा है

FCI जिस दाम पर अनाज खरीद कर जितने कम दाम पर राशन की दुकानों को बेचता है, उसकी भरपाई की जिम्मेदारी सरकार पर है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सरकार ने इस मद में FCI की पूरी भरपाई नहीं की है, जिसके चलते उसको हर साल कर्ज लेना पड़ रहा है।

FCI पर कुल 3.81 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है

FCI पर अभी कुल 3.81 लाख करोड़ रुपये यानी 51.83 अरब डॉलर का कर्ज है। मार्च 2021 को खत्म होने वाले वित्त वर्ष के लिए सरकार ने 1.15 लाख रुपये की फूड सब्सिडी देना तय किया है, लेकिन FCI का खर्च 2.33 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। दरअसल, कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन में राशन की दुकानों पर मुफ्त अनाज बांटा गया था। इसके चलते FCI का कर्ज बढ़ सकता है।



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By Raj

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