• Hindi News
  • Business
  • Gross Non performing Asset Ratio Decline To 7.5% At The End Of September 2020

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

44 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
  • बैंकों का GNPA सितंबर के अंत में घटकर 7.5 पर्सेंट रहने का जिक्र RBI ने 29 दिसंबर को जारी अपनी रिपोर्ट ऑन ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2019-20 में किया है
  • मोरैटोरियम, एसेट क्लासिफिकेशन पर रोक होने और डिविडेंड को वापस कारोबार में लगाए जाने से बैंकों का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पहली छमाही में बेहतर हुआ

बैंकों का ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो सितंबर 2020 के अंत में 7.5 पर्सेंट रह गया जो इसी साल मार्च के अंत में 8.2 पर्सेंट और पिछले साल मार्च के अंत में 9.1 पर्सेंट रहा था। इसका मतलब यह हुआ कि इस दौरान बैंकों के जिन लोन का ब्याज 90 दिन से ज्यादा समय से बकाया है, उनका प्रतिशत बैंकों के कुल लोन के मुकाबले घटा है। GNPA रेशियो में कमी आने का जिक्र रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 29 दिसंबर को जारी अपनी रिपोर्ट ऑन ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2019-20 में किया है।

बैंकों का कैपिटल टु रिस्क वेटेड एसेट रेशियो बढ़कर 15.8 पर्सेंट हो गया

रिजर्व बैंक का कहना है कि पब्लिक सेक्टर बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन (बैंकों को अपनी पूंजी का स्तर बासेल के नियमों में तय लेवल से ऊपर रखने के लिए सरकार ने अतिरिक्त पूंजी दी है) के साथ ही पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के बाजार से पूंजी जुटाने के चलते बैंकों का कैपिटल टु रिस्क वेटेड एसेट (CRAR) रेशियो सितंबर 2020 के अंत में 15.8 पर्सेंट हो गया। बैंकों का CRAR मार्च 2020 के अंत में 14.7 पर्सेंट और मार्च 2019 के अंत में 14.3 पर्सेंट था। बैंकों का CRAR अनुपात बताता है कि उसने लोन के रिस्क के हिसाब से कितनी प्रतिशत पूंजी अलग रखी है। इसका समुचित ज्यादा होना उसके भरोसेमंद होने की निशानी होती है।

बैंकों का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस 2020-21 की पहली छमाही में बेहतर हुआ

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो साल में लॉस होने के बाद बैंकों का नेट प्रॉफिट 2019-20 में पॉजिटिव हो गया। मोरैटोरियम, एसेट क्लासिफिकेशन पर रोक होने और डिविडेंड को वापस कारोबार में लगाए जाने से बैंकों का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस 2020-21 की पहली छमाही में बेहतर हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2018-19 में हुए टर्नअराउंड के बाद बैंकों को हुआ फायदा 2019-20 और 2020-21 की पहली छमाही में बढ़ा। रिजर्व बैंक की ट्रेंड एंड प्रोग्रेस रिपोर्ट में कोऑपरेटिव बैंकों और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस सहित समूचे बैंकिंग सेक्टर के 2019-20 और 2020-21 में अब तक परफॉर्मेंस का जिक्र किया गया है। इस रिपोर्ट में घरेलू फाइनेंशियल सेक्टर के आउटलुक के बारे में भी बताया गया है।

RBI ने कोविड-19 का असर काटने के लिए पॉलिसी लेवल पर कई उपाय किए

RBI ने कोविड-19 के असर को दूर करने के लिए पॉलिसी लेवल पर कई उपाय किए हैं। उसे सरकार ने को-ऑपरेटिव बैंकों, NBFC और होम लोन कंपनियों पर ज्यादा कंट्रोल दिया है। इसके अलावा उसने अपने सुपरवाइजरी फ्रेमवर्क को मजबूत बनाने के लिए बहुत से कदम उठाए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिवालिया अदालत से बड़े बैड लोन के मामले क्लीयर होने से रिकवरी प्रोसेस में तेजी आई। रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिकवरी में सारफेसी चैनल से भी मदद मिली है।



Source link

By Raj

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *