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नई दिल्ली33 मिनट पहले

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पश्चिम एशियाई व कुछ अफ्रीकी देश कोरोना महामारी के कारण वैश्विक स्तर पर अनाज की किल्लत होने की आशंका के कारण अनाज का भंडार तैयार कर रहे हैं - Dainik Bhaskar

पश्चिम एशियाई व कुछ अफ्रीकी देश कोरोना महामारी के कारण वैश्विक स्तर पर अनाज की किल्लत होने की आशंका के कारण अनाज का भंडार तैयार कर रहे हैं

  • अप्रैल-जनवरी 2020-21 में गैर बासमती चावल का निर्यात 115.44% बढ़कर 25,686 करोड़ रुपए पर पहुंच गया
  • 2019-20 की समान अवधि में 11,928 करोड़ रुपए के गैर बासमती चावल का निर्यात हुआ था

कोरोना महामारी के बावजूद भारत से गैर बासमती चावल के निर्यात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 के बीच इस खाद्यान्न का निर्यात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा हुआ। एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के मुताबिक अप्रैल-जनवरी 2020-21 में गैर बासमती चावल का निर्यात 115.44% बढ़कर 3.51 अरब डॉलर (करीब 25,686 करोड़ रुपए) पर पहुंच गया, जो 2019-20 की समान अवधि में 1.63 अर डॉलर (करीब 11,928 करोड़ रुपए) के स्तर पर था।

पश्चिम एशियाई व कुछ अफ्रीकी देशों में गैर बासमती चावल के निर्यात में कुछ महीनों से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसका कारण यह है कि ये देश चावल का भंडारण कर रहे हैं। ये देश कोरोना महामारी के कारण वैश्विक स्तर पर अनाज की कमी होने की आशंका के कारण अनाज का भंडार तैयार कर रहे हैं।

बासमती चावल का निर्यात 2.66% घटा

बासमती चावल का निर्यात हालांकि घटा है। अप्रैल-जनवरी 2020-21 में बासमती चावल का निर्यात 2.66% घटकर 3.27 अरब डॉलर पर आ गया, जो इससे एक साल पहले की समान अवधि में 3.36 अरब डॉलर था। मई 2020 के बाद से बासमती चावल के निर्यात में गिरावट का रुझान रहा है।

ईरान 12,000 टन चावल का आयात किया

अमेरिका के कृषि विभाग के आंकड़े के मुताबिक बासमती और गैर बासमती चावल के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में शामिल ईरान ने 2020-21 में अब तक 12,000 टन चावल का आयात किया है। 2019-20 में ईरान ने 11,250 टन चावल का आयात किया था। अप्रैल-दिसंबर 2020 में गैर बासमती चावल का काफी ज्यादा आयात करने वाले अन्य देशों में मेडागास्कर, मलेशिया, बेनिन, टोगो और सेनेगल शामिल हैं।

धान की बोआई का रकबा भी बढ़ा

भारत के कृषि मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक इस कारोबारी साल (2020-21) में धान के रबी फसल की बोआई का रकबा साल-दर-साल आधार पर करीब 17% बढ़कर 35 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। वहीं, खरीफ धान की बोआई का रकबा 6% बढ़कर 4.07 करोड़ हेक्टेयर हो गया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का अनुमान है कि APEDA के प्रोत्साहन से धान के निर्यात में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। 4 मार्च को पहली बार असम में उत्पादित लाल धान अमेरिका भेजा गया।

APEDA के निर्यात बास्केट में चावल का है एक बड़ा हिस्सा

APEDA के निर्यात बास्केट का एक बड़ा हिस्सा चावल का होता है। इसमें गैर बासमती चावल का हिस्सा 22.52% और बासमती चावल का हिस्सा करीब 20.99% का होता है। APEDA के चेयरमैन एम अंगामुथु ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान चावल का निर्यात जारी रखने के लिए हमने सावधानी और सुरक्षा के कई कदम उठाए।

बफेलो मीट के निर्यात में गिरावट

कोरोना संकट के दौरान जहां चावल का निर्यात बढ़ा है, वहीं कई अन्य खाद्य कमॉडिटी के निर्यात पर महामारी का नकारात्मक असर दिखा है। APEDA के निर्यात बास्केट में 16.83% हिस्सा रखने वाले बफेलो मीट के निर्यात में गिरावट आई है। अप्रैल-जनवरी 2020-21 में बफेलो मीट का निर्यात 2.62 अरब डॉलर का रहा। यह एक साल पहले की समान अवधि में हुए 2.78 अरब डॉलर के निर्यात के मुकाबले 5.62% कम है।

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By Raj

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