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नई दिल्लीएक महीने पहले

बाजार में एक बार फिर खरीदारों की कमी दिखने लगी है। अलग-अलग सर्वे के अनुसार कंज्यूमर गुड्स के दाम बढ़ने और नई नौकरियों में कमी के कारण लोग खरीदारी में कम रुचि दिखा रहे हैं। त्योहारों के कारण सितंबर और अक्टूबर में तो खरीदारों का सेंटिमेंट काफी बढ़ा हुआ था, लेकिन पहले नवंबर में इसमें गिरावट आई और अब दिसंबर में भी वही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। दिसंबर के पहले पखवाड़े के आंकड़ों के अनुसार IMPS ट्रांजैक्शन और एटीएम से पैसे निकालने में मासिक आधार पर जून के बाद पहली बार गिरावट आई है। IMPS ट्रांजैक्शन एक प्रतिशत और ATM ट्रांजैक्शन 5% कम हुआ है। NPCI के आंकड़े भी बताते हैं कि नवंबर की तुलना में रिटेल पेमेंट में गिरावट आई है।

रॉ मैटेरियल 40% तक महंगे

सेंटिमेंट में गिरावट का एक कारण है कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के दाम बढ़ना और इसकी वजह है रॉ मैटेरियल महंगा होना। कंपनियों का कहना है कि उनका सामान बनाने का खर्च 15 से 40% तक बढ़ा है। कॉपर, जिंक, एल्युमिनियम के नाम 15 से 20% बढ़े हैं, प्लास्टिक 30 से 40% महंगा हुआ है। समुद्र से ढुलाई का खर्च भी 40 से 50% बढ़ा है। अलग-अलग कंपनियों की वाशिंग मशीन और AC के दाम 8 से 10% और टेलीविजन के 7 से 20% बढ़े हैं या बढ़ने के आसार हैं।

सर्वे में नीचे आया कंज्यूमर सेंटिमेंट

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इकोनॉमी (CMIE) के सर्वे में नवंबर में कंज्यूमर सेंटिमेंट नीचे आ गया था। यह अक्टूबर में 52.5 था जो नवंबर में 51.8 रह गया। CMIE के एमडी और सीईओ महेश व्यास के अनुसार नौकरियां कम होने के कारण लोगों की इनकम घटी है, इसलिए वे अभी खरीदारी से बच रहे हैं। एजेंसी के सर्वे में अक्टूबर में 7.4% लोगों ने कहा था कि वे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदेंगे, लेकिन नवंबर में सिर्फ 6.5% ने खरीदारी में रुचि दिखाई। रिजर्व बैंक के कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे में भी नवंबर में सालाना आधार पर गिरावट आई। इस सर्वे के अनुसार कमजोर आर्थिक परिस्थितियों, नौकरियों में कमी और चीजों के बढ़ते दाम के कारण लोग खरीदारी से बच रहे हैं।

नवंबर में रिटेल बिक्री 13% कम

खरीदारों का सेंटिमेंट बिगड़ने का सीधा असर रिटेल कंपनियों पर दिख रहा है। रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सर्वे में पता चला कि नवंबर में बिक्री एक साल पहले के मुकाबले 13% कम रही। कपड़ों की बिक्री में 12% गिरावट आई है। पश्चिमी और पूर्वी राज्यों में बिक्री एक साल पहले की तुलना में क्रमश: 18 और 17% कम रही। उत्तरी और दक्षिणी राज्यों में यह गिरावट 9% है।

6 महीने में महामारी से पहले की तुलना में 85% बिक्री का स्तर

एसोसिएशन के सीईओ कुमार राजगोपालन के अनुसार फेस्टिव और शादियों के सीजन के चलते कुछ सेगमेंट में सुधार आया था। लेकिन जाड़ों में कम NRI के यहां आने से बिक्री पर असर पड़ा है। कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के चलते विदेश यात्रा पर पाबंदियों से आगे भी बिजनेस प्रभावित हो सकता है। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि अगले छह महीने में कोविड-19 महामारी से पहले की तुलना में 85% बिक्री का स्तर हासिल हो जाएगा। भारत की रिटेल इंडस्ट्री 854 अरब डॉलर यानी करीब 63 लाख करोड़ रुपए की है और जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी करीब 10% है।



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By Raj

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