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नई दिल्लीएक महीने पहले

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इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि गैर-परंपरागत समाधान और सरकारी मदद के बिना रिटेल सेक्टर में रिकवरी संभव नहीं है। - Dainik Bhaskar

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि गैर-परंपरागत समाधान और सरकारी मदद के बिना रिटेल सेक्टर में रिकवरी संभव नहीं है।

  • जेफ बेजोस और मुकेश अंबानी के बीच जंग के फैसले से रिटेल सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा
  • कोविड-19 की वैक्सीन आने के बाद भी उपभोक्ताओं आदतों में मूल रूप से बदलाव होगा

भारत के रिटेल मार्केट को दुनिया का सबसे ज्यादा प्रॉलिफिक मार्केट माना जाता है। इस मार्केट में अपना प्रभुत्व जमाने के लिए दो अरबपति कारोबारियों में जंग चल रही है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत में ऑनलाइन शॉपिंग में भारी उछाल आया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले साल की पहली छमाही में रिटेल मार्केट का कारोबार कोविड-19 से पहले के 85% स्तर तक पहुंच सकता है। 2025 तक भारत के रिटेल सेक्टर के 1.3 ट्रिलियन डॉलर का होने अनुमान जताया जा रहा है।

कोविड-19 के साथ शुरू हुई बेजोस-अंबानी की लड़ाई

2020 की शुरुआत में कोविड-19 के कारण रिटेल कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसी के साथ अरबपति जेफ बेजोस और मुकेश अंबानी के बीच सबसे ज्यादा बूमिंग वाले बाजार में प्रभुत्व जमाने की लड़ाई शुरू हुई थी। यह लड़ाई तब शुरू हुई थी जब मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने अगस्त में देश की दूसरी सबसे बड़ी रिटेल कंपनी फ्यूचर रिटेल को 24,713 करोड़ रुपए में खरीदने की घोषणा की थी। इससे एक साल पहले ही जेफ बेजोस की कंपनी अमेजन ने फ्यूचर रिटेल में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी खरीदी थी। अमेजन इस सौदे का विरोध कर रहा है। अमेजन ने फ्यूचर ग्रुप पर निवेश समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

अदालतों के बीच चल रहा है मामला

तब से अब तक यह मामला सिंगापुर और भारत की कोर्ट के बीच चल रहा है। माना जा रहा है कि इस मामले में जो भी फैसला आएगा, वो आने वाले सालों में भारत के रिटेल लैंडस्कैप में बदलाव कर सकता है। यदि इस लड़ाई में अमेजन को सफलता मिलती है तो रिलायंस की ई-कॉमर्स कारोबार विस्तार की योजना धीमी हो जाएगी। वहीं, अगर रिलायंस को सफलता मिलती है तो अमेरिका की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन की विस्तार योजना पर ब्रेक लग जाएगा। भारत के रिटेल सेक्टर में अपनी धाक जमाने के लिए मुकेश अंबानी ने कोविड काल में रिलायंस रिटेल की आंशिक हिस्सेदारी बेचकर 47,265 करोड़ रुपए जुटाए हैं।

2021 की पहली छमाही में सामान्य स्तर पर लौट आएगा रिटेल सेक्टर

मौजूदा समय में 854 बिलियन डॉलर करीब 63 लाख करोड़ रुपए के रिटेल सेक्टर को 2021 की पहली छमाही में कारोबार के सामान्य स्तर पर लौटकर आने की उम्मीद है। हालांकि, इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि गैर-परंपरागत समाधान और सरकारी मदद के बिना यह संभव नहीं है। कोविड-19 के कारण बंद पड़ी दुकानें, महीनों तक बिना कमाई, किराए के भुगतान में असमर्थता और वर्किंग कैपिटल को लेकर संघर्ष और मांग के अनुसार सप्लाई की चुनौती 2020 में रिटेल सेक्टर की प्रमुख कहानी रही हैं।

महामारी ने आवश्यक-गैर आवश्यक का कॉन्सेप्ट समझाया

रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) के CEO कुमार राजगोपालन का कहना है कि महामारी के दौरान सरकारी एक्शन ने हमें आवश्यक और गैर-आवश्यक कॉन्सेप्ट को अच्छे तरीके से समझाया है। लॉकडाउन के दौरान स्टोर बंद रहने से अपैरल, ज्वैलरी, शूज, CDIT (कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्यूरेबल्स, आईटी और टेलीफोन) समेत अन्य गैर-आवश्यक कैटेगरी के कारोबार में 100% नुकसान हुआ है। यही नहीं, आवश्यक कैटेगरी के कारोबारियों ने विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना किया है। इसमें मांग के अनुसार आपूर्ति, सप्लाई चेन, क्वालिटी बनाए रखना आदि प्रमुख रही हैं।

वैक्सीन आने के बाद लोग दुकानों में खरीदारी के लिए लौटेंगे

2021 की शुरुआत में वैक्सीन के बाजार में आने की संभावना के बीच बड़े मॉडर्न रिटेल कंपनीज और ऑफलाइन रिटेल स्टोर इस बात को लेकर आशान्वित हैं कि लोग कोविड से पहले की तरह दुकानों पर खरीदारी के लिए लौटेंगे। हालांकि, इन कंपनियों ने ग्राहकों तक पहुंचने के लिए ओमनी-चैनल मॉडल और डिजिटल रूट के जरिए फास्ट-ट्रैकिंग को अपना लिया है। राजगोपालन के मुताबिक, रिटेलर्स को उम्मीद है कि 2021 के पहले 6 महीनों में कारोबार प्री-कोविड के 85% स्तर तक लौट आएगा।

महामारी के खत्म होने में देरी के कारण सतर्कता बरतनी चाहिए

राजगोपालन का कहना है, ‘हालांकि वैश्विक स्तर पर कोविड-19 वैक्सीनेशन शुरू हो गया है। लेकिन महामारी की स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रित होने में समय लगेगा। ऐसे में रिटेलर्स को 2021 में आशावाद को लेकर सतर्कता बरतनी चाहिए। स्पेंसर्स एंड नेचर्स बास्केट के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO देवेंद्र चावला का कहना है कि हम आने वाले वर्षों को लेकर काफी आशावादी हैं। लॉट्स होलसेल सॉल्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्टर तनित चरणावत 2020 में रिटेल सेक्टर बड़े ट्रांसफॉर्मेशन से गुजरा है। अगले वर्षों में इसका सकारात्मक प्रभाव होगा और बाजार अपने पुराने फॉर्म में लौट आएगा।

2021 में तकनीक का अहम रोल होगा

मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया के MD और CEO अरविंद मेदीरत्ता का कहना है कि 2021 में रिटेल एक्सपीरियंस ट्रांसफॉर्मिंग में तकनीक का काफी अहम रोल रहेगा। ओमनी-चैनल के साथ रिटेलर ग्राहकों को लुभाने के लिए विभिन्न तरीके अपनाएंगे। इसमें तकनीक और इनोवेशन का मिश्रण होगा। इसके अलावा भविष्य में किसी भी संकट के दौरान कारोबारी ऑपरेशन को सुचारू रूप से रखने पर भी रिटेलर्स का फोकस रहेगा।

महामारी से उपभोक्ताओं की आदतों में बदलाव होगा

सीनियर वाइस-प्रेसीडेंट एंड हेड ऑफ फ्लिपकार्ट होलसेल आदर्श मेनन के मुताबिक, महामारी कुछ ग्राहकों की आदतों में मूल रूप से बदलाव कर देगी। उपभोक्ता केवल आवश्यक ट्रिप के लिए फिजिकल मूवमेंट करेंगे और इंडोर में रहने को प्राथमिकता देंगे। इसका नतीजा यह होगा कि ज्यादा उपभोक्ता ऑनलाइन ऑर्डर जारी रखेंगे और प्री-कोविड के पहले से ज्यादा डिलिवरी होगी। डेलॉय इंडिया के पार्टनर रजत वाही का कहना है कि मार्च 2020 तक भारत के रिटेल बाजार में ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी 3% से कम थी। लेकिन अब यह अधिकांश कैटेगरी में करीब दोगुना हो गई है। रजत का कहना है कि इस साल के अंत तक रिटेल बाजार में ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 6-7% तक हो सकती है।



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By Raj

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