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मुंबई5 मिनट पहले

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  • देश में खाने-पीने की चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी पिछले 20 दिनों से काफी बढ़ गई हैं
  • यह लगातार सातवां महीना है जब खुदरा महंगाई की दर 6% से ऊपर बनी हुई है। लगातार तीसरा महीना होगा, जिसमें यह 7% से ऊपर रह सकती है

देश में रिटेल महंगाई की दर नवंबर महीने में 7% से ऊपर रह सकती है। हालांकि अक्टूबर की तुलना में इसमें गिरावट होगी, फिर भी यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लक्ष्य से ऊपर ही रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि देश में खाने-पीने की चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी पिछले 20 दिनों से काफी बढ़ गई हैं।

अर्थशास्त्रियों के सर्वे पर राय

प्रसिद्ध इकोनॉमिस्ट के एक सर्वे में इस तरह की उम्मीद जताई गई है। इसके मुताबिक, रिजर्व बैंक का लक्ष्य रिटेल महंगाई को लेकर 2 से 6% है। पर अक्टूबर में भी यह इस लक्ष्य से ऊपर थी और नवंबर में भी यह ऊपर रह सकती है। अक्टूबर में यह 7.61% थी जबकि नवंबर में 7% से ऊपर रह सकती है। यह लगातार सातवां महीना है जब खुदरा महंगाई की दर 6% से ऊपर बनी हुई है।

यह मई 2014 के बाद से सबसे ऊंची दर महंगाई की है। जबकि नवंबर में अगर यह 7% पर रहती है तो लगातार तीसरा महीना होगा, जिसमें यह 7% से ऊपर रह सकती है।

कम महंगाई दर रहने की उम्मीद

केयर रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि अक्टूबर की तुलना में नवंबर में रिटेल महंगाई की दर कम रहने की उम्मीद है। क्योंकि अक्टूबर की तुलना में नवंबर में सब्जियों और दालों की कीमतों में कुछ कमी आई थी। जबकि दूसरी ओर इसी दौरान पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे महंगाई दर में बढ़त दिख सकती है।

2-4 दिसंबर तक आरबीआई की मीटिंग हुई थी

बता दें कि 2 से 4 दिसंबर के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी की मीटिंग हुई थी। इसमें रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। रिजर्व बैंक का लक्ष्य महंगाई पर है और वह इसे अपने दायरे में लाना चाहता है। हालांकि उसका फोकस अब ग्रोथ की ओर भी है। क्योंकि लॉकडाउन हटने और सब कुछ शुरू होने के बाद अब फोकस बदल गया है।

अभी भी ऊंचे स्तर पर रहेगी महंगाई दर

रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि महंगाई की दर अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी। हालांकि सिस्टम में इतनी लिक्विडिटी है कि इससे कोई दिक्कत नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था इस साल अपने ऐतिहासिक स्तर के गिरावट से गुजर रही है। पहली तिमाही में इसमें 23.9 पर्सेंट की गिरावट के बाद दूसरी तिमाही में 7.5 पर्सेंट की गिरावट देखी गई। हालांकि पहली तिमाही की तुलना मे इसमें सुधार कह सकते हैं। रिजर्व बैंक का मानना है कि इस पूरे वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में गिरावट ही रह सकती है।

क्या है खुदरा महंगाई

सरकार दो तरह की महंगाई दर जारी करती है- खुदरा महंगाई दर और थोक महंगाई दर। खुदरा महंगाई दर खुदरा चीजों की कीमतों के आधार पर तय की जाती है। खुदरा का मतलब दाल, सब्जी, मांस, मछली, अंडे, मसाले, पान , तंबाकू आदि से होता है। सरकार अपनी योजना बनाते समय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति तय करते समय खुदरा महंगाई दर को ही महत्व देते हैं। खुदरा महंगाई दर बढ़ने का सीधा मतलब यह है कि महंगाई की मार सीधे तौर पर आम आदमी पर पड़ रही है।



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By Raj

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